भारत सरकार द्वारा संचालित “ज्ञान भारतम् मिशन” के तहत देशभर में ऐसी पांडुलिपियों को संरक्षित करने और उन्हें डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित रखने की पहल की गई है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस समृद्ध विरासत से लाभान्वित हो सकें। इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी श्री आनंद शर्मा ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा “मधुबनी की यह सफलता हम सभी के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। मैं जिले के सभी नागरिकों, शिक्षकों, संस्थानों एवं सामाजिक संगठनों से आग्रह करता हूँ कि यदि उनके पास कोई भी पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपि उपलब्ध है, तो उसे चिन्हित कर उसके डिजिटाइजेशन में सहयोग करें। इससे हमारी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहेगी और आने वाली पीढ़ियों को इसका लाभ मिलेगा।” उन्होंने आगे कहा कि जिला प्रशासन इस दिशा में पूर्ण सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है और इस अभियान को जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।
जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि यदि आपके पास ऐसी पांडुलिपियाँ हैं जो अभी तक सूचीबद्ध नहीं हैं, या आपको अपने क्षेत्र में किसी पांडुलिपि की जानकारी है, अथवा आप किसी संस्था/परिवार से जुड़े हैं जो पांडुलिपियों का संरक्षण कर रहा है, तो आप “ज्ञान भारतम्” ऐप डाउनलोड कर इस अभियान से जुड़ सकते हैं और अपनी अमूल्य धरोहर को सुरक्षित करने में योगदान दे सकते हैं।विशेष जानकारी या सहयोग हेतु जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी के मोबाइल नंबर 9931747796 पर संपर्क किया जा सकता है। मधुबनी का यह प्रथम स्थान न केवल प्रशासनिक दक्षता का प्रतीक है, बल्कि यह जिले की समृद्ध सांस्कृतिक एवं बौद्धिक परंपरा को संरक्षित करने की दिशा में एक मजबूत कदम भी है। अब आवश्यकता है कि हर नागरिक इस अभियान से जुड़कर अपनी विरासत को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने में योगदान दे, ताकि हमारी पहचान और इतिहास सदा के लिए संरक्षित रह सके।

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