सीहोर : प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह मंदिर पर श्री नरसिंह चरितामृत का भव्य आयोजन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 28 अप्रैल 2026

सीहोर : प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह मंदिर पर श्री नरसिंह चरितामृत का भव्य आयोजन

  • प्रभु पर विश्वास रखने वाले भक्त की भगवान हर समय करते हैं रक्षा : पंडित हर्षित शास्त्री

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सीहोर।श्री शुभ नरसिंह जयंती के पावन अवसर पर पहली बार दो दिवसीय श्री नरसिंह चरितामृत का भव्य एवं दिव्य आयोजन किया गया। मंदिर परिसर में भव्य पंच कुण्डात्मक श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। बुधवार को महायज्ञ में सुबह नित्य पूजन और भगवान का दूध और दही से अभिषेक किया जाएगा। दो दिवसीय कथा के दौरान ज्योतिष एवं भागवत सिंधु आचार्य पं. हर्षित शास्त्री ने कहाकि भक्त को प्रभु पर हमेशा विश्वास बनाए रखना चाहिए। जो भक्त भगवान पर सदैव विश्वास बनाए रखता है भगवान उसकी हर पल रक्षा करते हैं। भगवान विष्णु की भक्ति करने के कारण भक्त प्रहलाद पर उसके पिता हिरण्यकश्यप ने कई जुल्म ढाए। भारी अत्याचार किए। यहां तक कि उसे जान से मरवाने की कोशिश भी की। मगर भगवान पर उसकी श्रद्धा और विश्वास होने के चलते हिरण्यकश्यप उसका बाल भी बांका न कर सका। दो दिवसीय कथा के दौरान संत माधवदास महाराज, मुख्य यजमान श्रीमती नमिता अखिलेश राय, यात्रा प्रभारी सन्नी सरदार, यज्ञाचार्य कुणाल व्यास आदि ने पंडित श्री शास्त्री का स्वागत सम्मान किया। मंदिर में पहला मौका है जब पंडित श्री शास्त्री के द्वारा भगवान नृसिंह की कथा का आयोजन किया गया।  


संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि मंदिर परिसर में स्थित भगवान शिव की पूजा अर्चना की जा रही है। बैशाख माह में पंचामृत के अलावा शहद, केसर सहित अन्य से भगवान शिव का अभिषेक किया गया। इसके अलावा मंदिर परिसर में नियमित रूप से सुंदरकांड, हनुमान चालीसा पाठ, रामचरित्र मानस का पाठ किया गया। इन दिनों वैशाख का माह चल रहा है। इस महीने तेज गर्मी पड़ती है क्योंकि इस दैारान सूर्य की रोशनी धरती पर ज्यादा देर तक रहती है। साथ ही सूर्योदय जल्दी हो जाता है और सूर्यास्त देरी से होता है। इसलिए ही इस समय दिन बड़े और रातें छोटी होती है। इस कारण स्कंद पुराण में भी बताया गया है कि वैशाख महीने में जल का दान करना चाहिए, पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करनी चाहिए और शिवलिंग पर जल चढ़ाना चाहिए। मौसम के मुताबिक ऐसा करने से कई गुना पुण्य मिलता है। भगवान शिव ने जन कल्याण के लिए समुद्र मंथन से निकला जहर पिया था। उस जहर की गर्मी से उनका शरीर नीला हो गया। उस गर्मी को कम करने के लिए ही शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा है। वैशाख महीने में गर्मी बहुत बढ़ जाती है। इसलिए इस महीने में खासतौर से शिवालयों में जल दान का विधान है।

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