दिल्ली : दो दिवसीय “पीयूष रंग महोत्सव” का समापन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 18 अप्रैल 2026

दिल्ली : दो दिवसीय “पीयूष रंग महोत्सव” का समापन

  • दुसरे दिन ‘पीयूष रंग महोत्सव’ में ‘ठाकुर ज़ालिम सिंह’ का प्रभावशाली मंचन

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नई दिल्ली। मंडी हाउस स्थित श्री राम सेंटर में स्वर्गीय पद्मभूषण एवं प्रख्यात विज्ञापन गुरु पीयूष पांडे जी की 71वीं जयंती के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय “पीयूष रंग महोत्सव” का समापन दूसरे दिन एक सशक्त नाट्य प्रस्तुति के साथ हुआ। इस अवसर पर रमा पांडे द्वारा लिखित एवं निर्देशित नाटक ‘ठाकुर ज़ालिम सिंह’ का मंचन किया गया। इस महोत्सव का आयोजन रतनव (रामा थिएटर नाट्य विद्या) द्वारा किया गया। नाटक का मूल भाव भगवद्गीता के प्रसिद्ध संदेश—“कर्म करते जाओ, फल की इच्छा मत करो”—से प्रेरित है। यह कथा दर्शाती है कि सही कर्म का बीज बोना ही मनुष्य का धर्म है, जबकि परिणाम की लालसा अक्सर उसके पतन का कारण बनती है।‘ठाकुर ज़ालिम सिंह’ एक सशक्त और रोमांचक कथा है, जो राजस्थान के एक निर्दयी शासक के जीवन के माध्यम से लोभ, सत्ता और परिवर्तन की संभावनाओं को सामने लाती है। नाटक का खलनायक शक्ति, धन और नियंत्रण की लालसा से संचालित होता है, जबकि नायक करुणा, न्याय और संतुलन के मार्ग पर चलता है। यह प्रश्न नाटक के केंद्र में है—क्या एक खलनायक को आत्मपरिवर्तन का अवसर मिल सकता है, या वह अपने ही अंधकार में खो जाता है?


पीयूष रंग महोत्सव के समापन पर बोलते हुए रमा पांडे ने कहा “हर खूबसूरत पल अंततः अपनी पूर्णता तक पहुँचता है, और यह ‘पीयूष रंग महोत्सव’ भी आज एक मधुर स्मृति बनकर हमारे हृदयों में बस गया है। यह महोत्सव मेरे प्रिय भाई पीयूष पांडे की यादों, उनके विचारों और उनके सृजनात्मक दृष्टिकोण को समर्पित एक भावनात्मक यात्रा रहा। मैं दिल से दिल्ली के सभी दर्शकों, कलाकारों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करती हूँ, जिन्होंने इसे इतना विशेष बनाया। हम अगले वर्ष फिर इसी उत्साह और नई ऊर्जा के साथ ‘पीयूष रंग महोत्सव’ लेकर लौटेंगे, जहाँ हम मिलकर कला और संस्कृति के सुरों को एक करेंगे—‘मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा।’ हमारा प्रयास रहेगा कि ग्रामीण वाचिक परंपराओं और लोक कथाओं को राष्ट्रीय रंगमंच तक लाकर उन्हें नई पहचान और सम्मान दिया जाए।” महोत्सव के पहले दिन ‘दरख़्त-ए-आज़ाद-ए-हिंद’ का मंचन हुआ, जिसे दर्शकों द्वारा अत्यंत सराहा गया। इस अवसर पर दो विशिष्ट सम्मानों से भी गणमान्य व्यक्तियों को अलंकृत किया गया। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के सदस्य सचिव श्री सचिदानंद जोशी को भारतीय संस्कृति के संरक्षण में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘संस्कृतश्री फॉर प्रेज़र्विंग कल्चर ऑफ इंडिया’ सम्मान प्रदान किया गया। वहीं, 99 वर्षीय पद्मश्री श्रीमती शीला झुनझुनवाला को उनके साहित्यिक अवदान के लिए ‘साहित्यश्री’ सम्मान से सम्मानित किया गया।

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