- दुसरे दिन ‘पीयूष रंग महोत्सव’ में ‘ठाकुर ज़ालिम सिंह’ का प्रभावशाली मंचन
पीयूष रंग महोत्सव के समापन पर बोलते हुए रमा पांडे ने कहा “हर खूबसूरत पल अंततः अपनी पूर्णता तक पहुँचता है, और यह ‘पीयूष रंग महोत्सव’ भी आज एक मधुर स्मृति बनकर हमारे हृदयों में बस गया है। यह महोत्सव मेरे प्रिय भाई पीयूष पांडे की यादों, उनके विचारों और उनके सृजनात्मक दृष्टिकोण को समर्पित एक भावनात्मक यात्रा रहा। मैं दिल से दिल्ली के सभी दर्शकों, कलाकारों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करती हूँ, जिन्होंने इसे इतना विशेष बनाया। हम अगले वर्ष फिर इसी उत्साह और नई ऊर्जा के साथ ‘पीयूष रंग महोत्सव’ लेकर लौटेंगे, जहाँ हम मिलकर कला और संस्कृति के सुरों को एक करेंगे—‘मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा।’ हमारा प्रयास रहेगा कि ग्रामीण वाचिक परंपराओं और लोक कथाओं को राष्ट्रीय रंगमंच तक लाकर उन्हें नई पहचान और सम्मान दिया जाए।” महोत्सव के पहले दिन ‘दरख़्त-ए-आज़ाद-ए-हिंद’ का मंचन हुआ, जिसे दर्शकों द्वारा अत्यंत सराहा गया। इस अवसर पर दो विशिष्ट सम्मानों से भी गणमान्य व्यक्तियों को अलंकृत किया गया। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के सदस्य सचिव श्री सचिदानंद जोशी को भारतीय संस्कृति के संरक्षण में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘संस्कृतश्री फॉर प्रेज़र्विंग कल्चर ऑफ इंडिया’ सम्मान प्रदान किया गया। वहीं, 99 वर्षीय पद्मश्री श्रीमती शीला झुनझुनवाला को उनके साहित्यिक अवदान के लिए ‘साहित्यश्री’ सम्मान से सम्मानित किया गया।
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