- श्रीराम का जीवन केवल कथा नहीं, बल्कि मानवता के लिए मार्गदर्शक : महंत उद्ववदास महराज

सीहोर। शहर के कंचन विहार विश्वनाथपुरी स्थित परिसर में श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर समिति के तत्वाधान में जारी नौ दिवसीय श्रीराम कथा के अंतिम दिवस महंत उद्ववदास महाराज ने श्रीराम के वनवास, भ्रातृ प्रेम, माता-पिता के प्रति आज्ञाकारिता और प्रजा के प्रति कर्तव्य जैसे प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। उन्होंने बताया कि श्रीराम का जीवन केवल कथा नहीं, बल्कि मानवता के लिए मार्गदर्शक है। कथा के अंतिम दिवस भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। पूरे परिसर में भजन-कीर्तन और प्रभु श्रीराम के जयघोष से वातावरण दिव्य और आस्थामय बना रहा। अपनी ओजस्वी वाणी से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, त्याग, मर्यादा और सत्य के मार्ग पर चलने की महत्ता को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन हमें कठिन परिस्थितियों में भी धर्म और सत्य का साथ न छोड़ने की प्रेरणा देता है। सत्य और धर्म के मार्ग पर चलकर ही आदर्श समाज की स्थापना संभव है, इस संदेश ने उपस्थित श्रद्धालुओं के मन को गहराई से प्रभावित किया। हनुमान जी के सब ऋणी उन्होंने सबके संकट मिटाये लक्ष्मण सीता भरत सुग्रीव और राम भी, गोस्वामी तुलसीदास जी को भगवान के दर्शन कराएं और राम चरित मानस की रचना करवाई, जो दु:ख मे भी मुस्कुरा दें वही श्रेष्ठ इंसान, जीवन मे सफल होना है तो बुजुर्गो का सम्मन करो उनके अनुभव से लाभ लेना चाहिए जवानी के जोश को वृद्धावस्था का होश मिलना जरुरी है, यश के पीछे मत भागो कर्म ऐसे करो कि यश आपके पीछे आए, रामायण जीवन जीने का सबसे अच्छा रास्ता समझाती है।
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