प्राचार्य प्रो. चंदन कुमार ने अपने विस्तृत संदेश में कहा कि “अभिभावक–शिक्षक बैठक केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण की दिशा में एक सशक्त माध्यम है। जब अभिभावक और शिक्षक मिलकर कार्य करते हैं, तब विद्यार्थियों के शैक्षणिक, मानसिक एवं नैतिक विकास को सही दिशा मिलती है। महाविद्यालय का लक्ष्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जिम्मेदार, आत्मनिर्भर, अनुशासित एवं नैतिक मूल्यों से युक्त नागरिक के रूप में विकसित करना है। वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन, सकारात्मक वातावरण एवं निरंतर प्रेरणा की आवश्यकता होती है, जिसमें अभिभावकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस प्रकार की बैठकों से समस्याओं की पहचान के साथ-साथ उनके समाधान के लिए सामूहिक प्रयास संभव हो पाता है।” डीन छात्र कल्याण डॉ. शशि भूषण कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि “विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अनुशासन, समय प्रबंधन, संचार कौशल एवं व्यक्तित्व विकास भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। अभिभावकों एवं शिक्षकों के बीच नियमित संवाद से विद्यार्थियों की समस्याओं को समय रहते समझा जा सकता है और उनके समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं। इस प्रकार की बैठकें विद्यार्थियों के करियर निर्माण एवं उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में अत्यंत सहायक सिद्ध होती हैं।” कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय परिवार की ओर से सभी अभिभावकों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया, जिनके सक्रिय सहयोग एवं सहभागिता से यह आयोजन अत्यंत सफल एवं सार्थक रहा। महाविद्यालय ने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन निरंतर होते रहेंगे, जिससे विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण की दिशा में और अधिक सशक्त कदम उठाए जा सकें।
दरभंगा (रजनीश के झा), 25 अप्रैल। इंजीनियरिंग महाविद्यालय में 24 एवं 25 अप्रैल को दो दिवसीय अभिभावक–शिक्षक बैठक (Parents Teacher Meeting) का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति, उपस्थिति, अनुशासन, व्यवहार, सह-पाठ्यक्रम एवं अतिरिक्त गतिविधियों के साथ-साथ उनके समग्र व्यक्तित्व विकास के विभिन्न पहलुओं पर अभिभावकों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना था। इस अवसर पर बड़ी संख्या में अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और महाविद्यालय परिसर में उपस्थित होकर विभिन्न विभागों के शिक्षकों से अपने बच्चों की प्रगति के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। शिक्षकों द्वारा प्रत्येक विद्यार्थी के प्रदर्शन, आंतरिक मूल्यांकन, कक्षा में सहभागिता, प्रयोगशाला कार्य, परियोजनाओं तथा व्यवहारिक दक्षताओं पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही जिन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है, उनके लिए अभिभावकों को उचित मार्गदर्शन एवं सुझाव प्रदान किए गए, ताकि विद्यार्थी और बेहतर प्रदर्शन कर सकें। बैठक के दौरान अभिभावकों ने भी अपने बहुमूल्य सुझाव एवं विचार साझा किए, जिससे शिक्षण–अधिगम प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी एवं छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। इस प्रकार का संवाद न केवल पारदर्शिता को बढ़ाता है, बल्कि महाविद्यालय एवं अभिभावकों के बीच विश्वास और सहयोग को भी सुदृढ़ करता है।

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