सीहोर : नौ दिवसीय दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 11 अप्रैल 2026

सीहोर : नौ दिवसीय दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन

  • श्रद्धा और विश्वास का सम्मिलन ही शिव और पार्वती का विवाह : संत उद्ववदास महाराज

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सीहोर। भगवान शिव भरोसे के प्रतीक हैं और पार्वती श्रद्धा की प्रतीक हैं। श्रद्धा और विश्वास का सम्मिलन ही शिव और पार्वती का विवाह है। विवाह के उपरांत ही मां पार्वती शिव को प्रसन्न करती हैं और शिवजी श्री राम कथा प्रारंभ करते हैं। इसी से राम कथा और श्रीराम जी के जन्म दोनों का प्रत्यक्ष रूप से राम कथा सुनने और भगवान राम के जन्म के बाद दर्शन करने का अवसर मानव के जीवन में आता है। यही शिव और पार्वती के विवाह का धार्मिक व आध्यात्मिक पक्ष है। उक्त विचार  शहर के कंचन विहार विश्वनाथपुरी में श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर समिति के तत्वाधान में नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के दूसरे दिन संत उद्ववदास महाराज ने कहे। श्रीराम कथा में भगवान शिव और माता सती का संवाद माता सती द्वारा प्रभु श्री राम की परीक्षा लेना, भगवान शिव और माता सती के संवाद के माध्यम से दांपत्य जीवन को सुखी रखने के उपाय, दक्ष प्रजापति के यज्ञ का विध्वंस, भगवान शिव को वर्णन करने की इच्छा से हिमाचल पुत्री माता पार्वती का तप, भगवान शिव एवं माता पार्वती के विवाह का प्रसंग ।


देर रात्रि को जारी श्रीराम कथा के दौरान उन्होंने सती प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए कहाकि पति-पत्नी में भरोसा होना जरूरी है। सती ने भगवान शिव की बात नहीं मानी और अपने पिता के यहां पर यज्ञ में गई। इसके पश्चात राजा दक्ष ने भगवान शिव का अहंकार में आकर अपमान किया। मैना ने मैं ना कहा, मोल भयो दस बीस, बकरे ने मैं-मैं कहां, कबीर कटायो सीस यह दोहा कबीर की शिक्षाओं को उजागर करता है कि कैसे एक व्यक्ति को अपने अहं और लोभ को त्याग देना चाहिए। इसका अर्थ यह है कि, जैसे बकरी मैं-मैं करती है, वैसे ही व्यक्ति को भी अपने अहं को त्याग देना चाहिए और कबीर की शिक्षाओं का पालन करना चाहिए। कथा के दूसरे दिन गुरुदेव के साथ हरिद्वार के संत श्री विशंभर दास भी पधारे। वहीं संकट मोचन हनुमान मंदिर समिति द्वारा शहरवासियों से अपील की गई है कि अधिक से अधिक संख्या में कथा में पधार कर लाभ ले। महाराज श्री द्वारा बताया गया कि आदमी के जीवन का 10 प्रतिशत सुख भौतिक चीजों से प्राप्त होता है शेष 90 प्रतिशत सुख या दुख उसे अपने ही विचारों से प्राप्त होता है कथा ही विचारों को इस प्रकार से उन्नत कर सकती है कि व्यक्ति अपने जीवन में सुख का अनुभव करे।

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