- श्रद्धा और विश्वास का सम्मिलन ही शिव और पार्वती का विवाह : संत उद्ववदास महाराज
देर रात्रि को जारी श्रीराम कथा के दौरान उन्होंने सती प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए कहाकि पति-पत्नी में भरोसा होना जरूरी है। सती ने भगवान शिव की बात नहीं मानी और अपने पिता के यहां पर यज्ञ में गई। इसके पश्चात राजा दक्ष ने भगवान शिव का अहंकार में आकर अपमान किया। मैना ने मैं ना कहा, मोल भयो दस बीस, बकरे ने मैं-मैं कहां, कबीर कटायो सीस यह दोहा कबीर की शिक्षाओं को उजागर करता है कि कैसे एक व्यक्ति को अपने अहं और लोभ को त्याग देना चाहिए। इसका अर्थ यह है कि, जैसे बकरी मैं-मैं करती है, वैसे ही व्यक्ति को भी अपने अहं को त्याग देना चाहिए और कबीर की शिक्षाओं का पालन करना चाहिए। कथा के दूसरे दिन गुरुदेव के साथ हरिद्वार के संत श्री विशंभर दास भी पधारे। वहीं संकट मोचन हनुमान मंदिर समिति द्वारा शहरवासियों से अपील की गई है कि अधिक से अधिक संख्या में कथा में पधार कर लाभ ले। महाराज श्री द्वारा बताया गया कि आदमी के जीवन का 10 प्रतिशत सुख भौतिक चीजों से प्राप्त होता है शेष 90 प्रतिशत सुख या दुख उसे अपने ही विचारों से प्राप्त होता है कथा ही विचारों को इस प्रकार से उन्नत कर सकती है कि व्यक्ति अपने जीवन में सुख का अनुभव करे।

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