सीहोर : आज किया जाएगा श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर विशाल भंडारा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

बुधवार, 29 अप्रैल 2026

सीहोर : आज किया जाएगा श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर विशाल भंडारा

  • लगातार पांच दिनों तक किया गया भव्य पंच कुण्डात्मक श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ

Vishal-buandara-sehore
सीहोर। शहर के कोलीपुरा स्थित प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर में हर साल की तरह इस साल भी नृसिंह जयंती आस्था और उत्साह के साथ मनाई जाएगी। इसके लिए कई सालों बाद श्री-श्री 1008 महामंडलेश्वर महंत रामभूषण दास महाराज के मार्गदर्शन में सैकड़ों की संख्या में साधु-संतों ने मंदिर परिसर में जारी पंच कुण्डात्मक श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के दर्शन किए है। वहीं गुरुवार को सुबह नृसिंह भगवान का पूजन, नित्य पूजन, हवन और पूर्णाहुति के पश्चात शाम को छह बजे से भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा। जिसमें करीब 25 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को भोजन प्रसादी का वितरण किया जाएगा। दो दिवसीय नृसिंह कथा का आयोजन पंडित हर्षित शास्त्री के द्वारा किया गया था। इस मौके पर संत माधव दास महाराज, मुख्य यजमान श्रीमती नमिता अखिलेश राय सहित मंदिर परिसर में पहुंचे श्रद्धालुओं ने स्वागत सम्मान किया।


बुधवार की सुबह संत माधव दास महाराज, मुख्य यजमान श्रीमती नमिता अखिलेश राय, यज्ञाचार्य पंडित कुणाल व्यास, सन्नी सरदार सहित अन्य ने यहां पर भगवान का दूध और दही से यज्ञ किया। इस मौके पर संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि यज्ञ भारतीय संस्कृति में जीवन जीने की एक पद्धति है, जो शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक और पर्यावरणीय शुद्धि लाती है। यह वातावरण को कीटाणुरहित करने के साथ-साथ मानसिक शांति, रोगमुक्ति, और आत्मिक प्रगति प्रदान करता है। यज्ञ से दुराचारों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे आत्मिक सुख व सात्विकता बढ़ती है। यज्ञ की अग्नि में स्वाहा करने का भाव हमारे अहंकार और कुविचारों को भस्म करता है, जिससे त्याग और सेवा की भावना विकसित होती है। सनातन धर्म में विभिन्न अवसरों पर यज्ञ किया जाता है जैसे बच्चे के जन्म पर, त्योहारों पर, गृह प्रवेश के समय या किसी शुभ कार्य के दौरान। ऐसा माना जाता है कि यज्ञ करने से भगवान का आशीर्वाद मिलता है और व्यक्ति के कार्यों में कोई बाधा नहीं आती है। साथ ही यह घर की सुख-समृद्धि के लिए आवश्यक होते हैं। शास्त्रों में कुछ ऐसे यज्ञों का जिक्र किया गया है, जो व्यक्ति को अपने जीवन में जरूर करना चाहिए। हर साल की तरह इस साल भी नृसिंह जयंती मनाई जाती है। इस बार यहां पर भव्य पंच कुण्डात्मक श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का आयोजन किया गया था। इसकी शुरूआत भव्य महाकुंभ कलश यात्रा के साथ की गई। गुरुवार को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। 

कोई टिप्पणी नहीं: