- लगातार पांच दिनों तक किया गया भव्य पंच कुण्डात्मक श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ
बुधवार की सुबह संत माधव दास महाराज, मुख्य यजमान श्रीमती नमिता अखिलेश राय, यज्ञाचार्य पंडित कुणाल व्यास, सन्नी सरदार सहित अन्य ने यहां पर भगवान का दूध और दही से यज्ञ किया। इस मौके पर संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि यज्ञ भारतीय संस्कृति में जीवन जीने की एक पद्धति है, जो शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक और पर्यावरणीय शुद्धि लाती है। यह वातावरण को कीटाणुरहित करने के साथ-साथ मानसिक शांति, रोगमुक्ति, और आत्मिक प्रगति प्रदान करता है। यज्ञ से दुराचारों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे आत्मिक सुख व सात्विकता बढ़ती है। यज्ञ की अग्नि में स्वाहा करने का भाव हमारे अहंकार और कुविचारों को भस्म करता है, जिससे त्याग और सेवा की भावना विकसित होती है। सनातन धर्म में विभिन्न अवसरों पर यज्ञ किया जाता है जैसे बच्चे के जन्म पर, त्योहारों पर, गृह प्रवेश के समय या किसी शुभ कार्य के दौरान। ऐसा माना जाता है कि यज्ञ करने से भगवान का आशीर्वाद मिलता है और व्यक्ति के कार्यों में कोई बाधा नहीं आती है। साथ ही यह घर की सुख-समृद्धि के लिए आवश्यक होते हैं। शास्त्रों में कुछ ऐसे यज्ञों का जिक्र किया गया है, जो व्यक्ति को अपने जीवन में जरूर करना चाहिए। हर साल की तरह इस साल भी नृसिंह जयंती मनाई जाती है। इस बार यहां पर भव्य पंच कुण्डात्मक श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का आयोजन किया गया था। इसकी शुरूआत भव्य महाकुंभ कलश यात्रा के साथ की गई। गुरुवार को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

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