- कुबेरेश्वरधाम पर प्राण प्रतिष्ठा के बाद श्रद्धालुओं के लिए खुला मंदिर, भगवान के दर्शन को पहुंचे हजारो श्रद्धालु
हर युग की झलक दिखाई देती मंदिर परिसर में
इस मौके पर हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पंडित श्री मिश्रा ने कहाकि धाम की पावन भूमि जहाँ विराज मान है सिद्ध पीठ श्री कुबरेश्वर धाम मुरली मनोहर मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का सादगी और आस्था के साथ समापन किया गया है। पूरे भारत की भूमि का मात्र एक ऐसा स्थान कुबरेश्वर धाम जो बारह ज्योतिर्लिंग के मध्य है यहां आने वाले शिव भक्त कंकर शंकर की पूजन करके भगवान देव महादेव की अनुपम कृपा प्राप्त करते है उसी पवित्र भूमि पर मुरली मनहोर मंदिर एक ऐसा मंदिर जहां सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग का एक साथ दर्शन इस कलियुग में केवल एक ही जगह पर होगा वो हे श्री कुबरेश्वर धाम इस बाबा कुबेर भण्डारी की पवित्र भूमि पर मुरली मनोहर मंदिर के कपाट सभी शिव भक्ति के लिए अब खुले रहेगे। बुधवार को सुबह अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के मार्गदर्शन में सवा लाख से अधिक वैदिक मंत्रों में बड़ी संख्या में विप्रजनों की उपस्थिति में पंडित समीर शुक्ला, पंडित विनय मिश्रा सहित समिति की ओर से यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया। वहीं दोपहर में शीतल पेयजल आदि निशुल्क रूप से वितरण किया गया।
कलियुग में कथा और सत्संग अमृत के समान
कलियुग में कथा और सत्संग अमृत के समान है जिनके सुनने मात्र से जीव को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों की प्राप्ति हो जाती है। जिस भी कामना को लेकर इस कथा का श्रवण श्रद्धा भक्ति विश्वास के साथ किया जाता है वह कामना अवश्य पूरी होती है। भगवान के अवतार के कारण अनेक होते हैं। जब-जब धर्म की हानि होती है और धरती पर पाप व अधर्म बढ़ता है तब-तब भगवान किसी किसी ना रूप में अवतार लेकर धर्म की रक्षा करते हैं। भगवान के एक अवतार के पीछे अनेक कारण और रहस्य छिपा होता है। जब तक भगवान की कृपा नहीं होती तब तक भगवान को और उनकी लीला को समझ पाना मुश्किल है। भगवान को समझने और उन्हें पाने के लिए मन का निर्मल होना जरूरी है जब तक मन निर्मल नहीं होगा कोई कितना भी प्रयत्न कर लो भगवान को प्राप्त नहीं कर सकता।
भक्तों के लिए नियमित रूप से होंगे भगवान के दर्शन
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि कुबेरेश्वरधाम बुधवार को प्राण-प्रतिष्ठा के पश्चात भारत यह अपने आप में ऐसा विशिष्ट मंदिर हैं जहां चारों युगों सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग के प्रतीक, देवता या अवतार एक साथ दर्शन देते हैं। यहां पर भगवान शिव-पार्वती, भगवान राम-सीता और भगवान मुरली-मनोहर की मनमोहक प्रतिमाएं यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है।

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