- 30 अपै्रल को किया जाएगा नगर भोज का आयोजन

सीहोर। शहर के इतिहास में पहली बार प्राचीन सिद्धपीठ श्री नृसिंह लक्ष्मी मंदिर कोलीपुरा के तत्वाधान में होने जा रहे भव्य पंच कुण्डात्मक श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का शुभारंभ भव्य रूप से 25 अपै्रल को महाकाल-पुरी की तर्ज पर श्री लक्ष्मी नारायण सवारी के साथ किया जाएगा। इस भव्य सवारी में देश भर से आने वाले नागा साधुओं के अलावा निहंग सिख, कलश धारण करती महिलाओं के अलावा, गरबा करने वाली बच्चियों के अलावा अखाडे, स्कूल बैंड, देवताओं की झांकी, बर्फानी बाबा, माता लक्ष्मी और नारायण आदि भगवान के रथ निकाले जाऐंगे। भव्य पंच कुण्डात्मक श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ महोत्सव के अंतर्गत होने वाले सवारी कलश यात्रा को लेकर मुख्य यजमान श्रीमती नमिता अखिलेश राय के मार्गदर्शन में श्री लक्ष्मी नृसिंह मंदिर कोलीपुरा के अधिकारी संत माधव दास महाराज और यज्ञाचार्य पंडित कुणाल व्यास के निर्देश पर शनिवार को सवारी के प्रभारी सन्नी सरदार ने बताया कि क्षेत्रवासियों के सहयोग से महाकाल/पुरी की तर्ज पर ऐतिहासिक श्री लक्ष्मी/नारायण की भव्य कलश यात्रा शहर में निकाली जाएगी। यात्रा के संबंध में बैठक का आयोजन किया गया था। जिसमें बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी शामिल थे। उन्होंने बताया कि श्री-श्री 1008 महामंडलेश्वर महंत रामभूषण दास महाराज, महंत राघव दाय महाराज के आह्वान पर देश भर के अनेक साधु, नागा, बैरागी, त्यागी और अन्म महंत आगामी 25 अपै्रल को दोपहर बारह बजे मंदिर में एक बैठक का आयोजन किया जाएगा और उसके पश्चात शाम चार बजे भव्य सवारी निकाली जाएगी। उक्त आयोजन भगवान नृसिंह प्रकटोत्सव महोत्सव को लेकर छह दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
भगवान नृसिंह प्रकटोत्सव महोत्सव का महत्व, भक्त की रक्षा के लिए होता अवतार
जिला संस्कार मंच के मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि आगामी 30 अपै्रल को मंदिर के तत्वाधान में सभी के सहयोग से नगर भोग का आयोजन किया जाएगा। इस दिन भगवान को प्रकटोत्सव मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि पद्म और स्कंद पुराण के मुताबिक वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी पर भगवान नरसिंह प्रकट हुए थे।नृसिंह अवतार सतयुग के चौथे चरण में हुआ था। ये भगवान विष्णु के रौद्र रूप का अवतार है। भगवान विष्णु अपने भक्त प्रहलाद को दैत्य हिरण्यकश्यप से बचाने के लिए इस रूप में प्रकट हुए। ये अवतार प्रदोष काल में हुआ था, इसलिए शाम को भगवान नरसिंह की विशेष पूजा होती है। दैत्य हिरण्यकश्यप का बेटा प्रहलाद भगवान विष्णु का भक्त था, इसलिए प्रहलाद पर अत्याचार होते थे। कई बार मारने की कोशिश भी की गई। भगवान विष्णु अपने भक्त को बचाने के लिए खंबे से नरसिंह रूप में प्रकट हुए। इनका आधा शरीर सिंह का और आधा इंसान का था। इसके बाद भगवान नरसिंह ने हिरण्यकश्यप को मार दिया। ये अवतार बताता है कि जब पाप बढ़ता है तो उसको खत्म करने के लिए शक्ति के साथ ज्ञान भी जरूर होता है। ज्ञान और शक्ति पाने के लिए भगवान नरसिंह की पूजा की जाती है।
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