- सीईपीसी के वेबिनार में निर्यातकों की भागीदारी, कारीगरों की सुरक्षा और व्यापार को गति देने पर गहन मंथन
- निर्यातकों को किया जागरूक, कारीगरों के अधिकार और बिज़नेस ग्रोथ पर फोकस
- नए नियमों से सुरक्षा, सम्मान और ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ को मिलेगा बढ़ावा
मुख्य वक्ता के रूप में वी.वी. गिरी नेशनल लेबर इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो डॉ. संजय उपाध्याय ने बताया कि केंद्र सरकार ने 29 श्रम कानूनों को समाहित कर चार लेबर कोड बनाए हैं, जिनका उद्देश्य कानूनों को सरल बनाना, सामाजिक सुरक्षा को सार्वभौमिक करना और कार्यबल को औपचारिक रूप देना है। उन्होंने कोड ऑन वेजेज 2019, कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी 2020, ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड 2020 और इंडस्ट्रियल रिलेशन्स कोड 2020 की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि इन कोड्स को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए तो यह कारीगरों को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर अवसर प्रदान कर सकते हैं, जिससे भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी। पूर्व उप मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) तेज बहादुर ने अपने संबोधन में मजदूरी की नई परिभाषा, पीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण पर पड़ने वाले प्रभावों की विस्तार से जानकारी दी। साथ ही अनुबंध श्रम व्यवस्था में नियोक्ता और ठेकेदार की जिम्मेदारियों और श्रमिकों के अधिकारों पर भी प्रकाश डाला। वेबिनार के ओपन हाउस सत्र में निर्यातकों ने सक्रिय रूप से अपने सवाल रखे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से जवाब दिया। समापन सत्र में सीईपीसी के उपाध्यक्ष असलम महबूब ने कहा कि यह वेबिनार निर्यातकों के लिए बेहद उपयोगी और मार्गदर्शक साबित हुआ। उन्होंने सभी प्रतिभागियों और विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया। यह इंटरैक्टिव सत्र न केवल जागरूकता बढ़ाने में सफल रहा, बल्कि कारपेट उद्योग को नए श्रम कानूनों के अनुरूप ढालने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी साबित हुआ।

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