विवेक कुमार ने आगे कहा कि बिहार सरकार पर लगभग 4 लाख करोड़ का कर्ज है, जिसका 40 हजार करोड़ रुपए सालाना ब्याज देना पड़ रहा है। मतलब हर दिन करीब 100 करोड़ रुपये सिर्फ कर्ज चुकाने में जल रहे हैं। वहीं, फिस्कल डेफिसिट 12% के आसपास यानी सुरक्षित सीमा से बहुत ऊपर, लेकिन सरकार के द्वारा सब ठीक बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्थिति इतनी बदहाल है कि कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं, बच्चों को पढ़ाई के लिए स्कीम का पैसा सरकार नहीं दे पा रही है। बिहार की ऐसी बदहाली इसलिए है क्योंकि सरकार ने चुनाव जीतने के लिए जनता का वोट खरीदा और त्वरित लाभ देकर लंबे समय का भविष्य बेच दिया गया। वहीं, पार्टी के वरिष्ठ नेता कैप्टन राजीव ने कहा कि राज्य का वित्तीय कुप्रबंधन केवल शासन का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह बिहार के असहाय, गरीब, वृद्ध और विकलांग नागरिकों के खिलाफ एक अपराध है, जो राज्य की कल्याणकारी योजनाओं पर पूरी तरह निर्भर है। ये योजनाएं पूरी तरह ठप हो गई है क्योंकि राज्य के पास भुगतान करने के लिए पैसे नहीं हैं। आकस्मिक निधि चुनावी रिश्वत के रूप में वोट खरीदने में खर्च हो गई और अब खजाना खाली है, केंद्रीय सहायता की प्रतीक्षा में। पैसे की कमी का मतलब है सरकारी कर्मचारियों को वेतन नहीं, विकास नहीं, रोजगार सृजन नहीं, जिससे अपराध और अराजकता बढ़ रही है। मौके पर विवेक कुमार, मीडिया प्रदेश प्रभारी ओबैदुर रहमान, कैप्टन राजीव, सोनाली आनंद मौजूद रहीं।
पटना (रजनीश के झा), 23 अप्रैल। जन सुराज पार्टी ने बिहार की वर्तमान वित्तीय स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता विवेक कुमार ने कहा कि बिहार में लोकतंत्र की जगह अब वोट खरीदने की राजनीति ने ले ली है, जहां अल्पकालिक लाभ देकर जनता के भविष्य के साथ समझौता किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार रिजर्व बैंक से एक बार फिर लगभग 12,000 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने की तैयारी में है। जबकि पहले ही सरकार ने ऊपर 3.70 लाख करोड़ का कर्ज है। यह स्थिति इसलिए उत्पन्न हुई क्योंकि पहले बिना ठोस वित्तीय योजना के सरकार ने चुनाव में जनता को लुभाने के लिए कहीं पैसे, कहीं मुफ्त बिजली, तो कहीं वेतन वृद्धि का वादा किया। जिसका परिणाम आज ये है कि सरकार आर्थिक संकट से गुजर रही है।

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