सीहोर : श्रीमद् भागवत कथा में शिव विवाह नृसिंह अवतार के सुनाए प्रसंग - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 20 मई 2026

सीहोर : श्रीमद् भागवत कथा में शिव विवाह नृसिंह अवतार के सुनाए प्रसंग

  • आज किया जाएगा वामन अवतार, श्रीराम जन्म और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

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सीहोर। शहर के खजांची लाइन स्थित ब्राह्मण धर्मशाला में सर्व ब्राह्मण समाज महिला मंडल के तत्वाधान में जारी सात दिवसीय भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार को कथावाचक पंडित रविशंकर तिवारी ने कहा कि भगवान भाव के भूखे होते हैं। हमारी भक्ति से भगवान हमारे करीब आते है। भगवान नृसिंह अपने भक्त प्रहलाद की पुकार सुनकर आए थे, मनुष्य को भागदौड़ के जीवन में से प्रतिदिन कुछ समय ईश्वर स्मरण स्तुति के लिए निकालना चाहिए। उन्होंने शिव विवाह, नृसिंह अवतार और भक्त प्रहलाद से जुड़े प्रसंग सुनाए। वे बोले-जहां भी मौका मिले दान पुण्य और परोपकार के काम करें। इस दौरान संगीतमय भजनों पर महिलाओं ने नृत्य किया। पंडित श्री तिवारी ने कहाकि भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार की कथा तो हम सभी जानते हैं। हिरण्यकश्यप जैसे अधर्मी को मारने और भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए विष्णु भगवान नृसिंह अवतार लेकर स्तंभ में से प्रकट हुए। उन्होंने हिरण्यकश्यप को उठाया और महल की चौखट पर लाकर अपनी गोद में लिटा लिया और अपने नाखूनों से उसका सीना चीर दिया। लेकिन हिरण्यकश्यप का अंत करने के बावजूद उनका क्रोध शांत नहीं हुआ। जिससे भू लोक, स्वर्ग लोक और पाताल लोक कांपने लगा। प्रभु के क्रोध को शांत करने की शक्ति सिर्फ महाकाल भगवान शिव के पास ही हो सकती थी। सारे देव शिवजी की स्तुति करने लगे। तब जाकर भक्तों की पुकार पर शिव उन्हें शांत करने गए। लेकिन नृसिंह भगवान का क्रोध शांत करने मे वो भी असफल हुए। फिर त्रिकालदर्शी शिवजी ने मानव, चील और सिंह के शरीर वाले भगवान सर्वेश्वर का अवतार लिया। नृसिंह और सर्वेश्वर अवतारों युद्ध चला। अपने क्रोध को शांत किया। सभी देवों ने विष्णु स्तुति की तब भगवान नरसिंह श्रीहरि में लीन हो गए।


आज मनाया जाएगा जन्मोत्सव

सर्व ब्राह्मण समाज महिला मंडल की अध्यक्ष नीलम शर्मा ने बताया कि शहर के खजांची लाइन स्थित ब्राह्मण धर्मशाला में जारी सात दिवसीय भागवत कथा के चौथे दिवस भगवान श्रीराम जन्म, श्री कृष्ण और श्री वामन अवतार का जन्मोत्सव आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इसके अलावा शुक्रवार को श्री गिरिराज की पूजा और छप्पन भोग लगाया जाएगा।

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