अपर समाहर्ता, आपदा ने बताया कि जिले में संभावित बाढ़ के दृष्टिकोण से जिलान्तर्गत 93 सरकारी नाव है, जिसमे 28 परिचालन योग्य है तथा 22 मरम्मत योग्य है जिसकी मरम्मति करायी जा रही है। 41 निजी नाव मालिकों के साथ एकरारनामा किया जा रहा है। जिलान्तर्गत 07 मोटरवोट उपलब्ध है। मधुबनी जिला में विभिन्न अंचलों में 290 आपदा मित्र प्रशिक्षित है। मधुबनी जिले के सभी अंचलों को मिलाकर कुल-67320 पॉलीथिन शीटों की उपलब्धता है। जिलाधिकारी ने बताया कि जिले में बाढ़ आश्रय स्थल की पहचान कर सारी तैयारियां पूरी कर ली गई है। बाढ़ राहत केंद्र के तहत कुल 242 शिविरों की पहचान की गई है, जिसमे 97023 लोगो की ठहरने की व्यवस्था है। इन सब के लिए सामुदायिक रसोई के लिए 231 स्थानों को भी चिन्हित किया गया है। जिसमें रोजाना कुल 92916 लोग भोजन प्राप्त कर सकते हैं। सभी चिन्हित बाढ़ आश्रय स्थलों का भौतिक सत्यापन का कार्य किया जा रहा है और उन जगहों पर पेयजल , शौचालय आदि मूलभूत सुविधाओं का आकलन किया जा रहा है जो अब अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि जिला आपातकालीन संचालन केंद्र तीन शिफ्ट में 24 x 7 कार्यरत है, जिसका नंबर 06276-222576 है।
मधुबनी (संवाददाता), 26 मई । प्रभारी मंत्री ने डीआरडीए सभागार में बैठक कर संभावित बाढ़ सुखाड़ की पूर्व तैयारियों की बैठक कर विस्तृत समीक्षा किया। उन्होंने कहा कि संभावित बाढ़ सुखाड़ के प्रभाव को कम से कम करने को लेकर सरकार दृढ संकल्पित है एवं पूरी गंभीरता के साथ प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि बाढ़ सुखाड़ जैसी आपदा की स्थिति उत्पन्न होने पर समय पर पीड़ितों को राहत उपलब्ध कराए जाने को लेकर पूरी गंभीरता के साथ लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि बाढ़ सुखाड़ दोनों ही स्थितियो में वैकल्पिक फसल योजना के लिए पूरी तैयारी अविलंब कर लें। अपर समाहर्ता, आपदा, द्वारा पावर पॉइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से जिले में अबतक की गई संभावित बाढ़ सुखाड़ की पूर्व तैयारियों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि मधुबनी जिला पारंपरिक रूप से आपदा के प्रति संवेदनशील जिला रहा है। लगभग 18 नदियों और उसकी सहायक नदियां जिले से गुजरती हैं। उन्होंने बताया कि जिले की महत्वपूर्ण नदियों के जलस्तर प्रतिदिन प्रति तीन घण्टे पर ली जा रही है। उन्होंने कहा कि बिहार मौसम सेवा केंद्र के अनुसार जून 2026 से सितंबर 2026 तक वर्षापात सामान्य से नीचे रहन की संभावना है। उन्होंने कहा कि कम वर्षापात की स्थिति की संभावना को देखते हुए सभी आवश्यक तैयारियों को समय से पूर्ण किया जाए। जल संसाधन विभाग के अभियंताओं को निर्देश दिया गया कि नहरों के अंतिम छोर तक पानी उपलब्ध यह सुनिश्चित करगे, ताकि, किसानों को रोपनी के समय सिंचाई की दिक्कत न हो।

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