- हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे कुबेरेश्वरधाम

सीहोर। हर साल की तरह इस साल भी जिला मुख्यालय के समीपस्थ विश्व में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केन्द्र कुबेरेश्वरधाम में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने एक साथ मटकी के कलश से भगवान शिव का जलाभिषेक किया। वहीं यहां पर जारी निशुल्क भंडारे में विठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला सहित अन्य ने यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया। अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहाकि निरंतर जलधारा महादेव को प्रसन्न करती है, जिससे भक्तों के घर में धन-धान्य और सुख-शांति की वृद्धि होती है गंगा दशहरा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। इसमें स्नान, दान, रूपात्मक व्रत होता है। ऐसी मान्यता है कि ग्रीष्म ऋतु में पानी की बहुत समस्या होती है और व्यक्ति व पशु-पक्षी बूंद-बूंद पानी के लिए भटकते हैं। इसी वजह से शिवलिंग पर अभिषेक कलश रखा जाता है। जिससे भगवान शिव को पानी की कमी न हो। कुबेरेश्वरधाम पर शाम को अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित श्री मिश्रा बाबा की आरती में पहुंचे थे, इसके अलावा सुबह मुरली मनोहर मंदिर में विराजमान भगवान शंकर-माता पार्वती, राम-सीता और भगवान श्रीकृष्ण और राधा का विशेष श्रृंगार किया गया।
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ कराया था। इंद्र ने यज्ञ का घोड़ा को कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया। राजा सगर के साठ हजार पुत्र घोड़े को ढूंढ़ते-ढूंढ़ते जब कपिल मुनि के आश्रम पहुंचे, तो उन्होंने मुनि पर घोड़ा चुराने का आरोप लगा दिया। इससे क्रोधित होकर कपिल मुनि ने अपने तप के प्रभाव से सगर पुत्रों को भस्म कर दिया। बाद में राजा भगीरथ ने मां गंगा और भगवान शिव की कठोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया। भगीरथ के प्रयासों से मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुईं और सगर पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ। मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण के उपलक्ष्य में ही गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। गंगा दशहरा का धार्मिक और सामाजिक महत्व अत्यंत बड़ा है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है। दशहराÓ शब्द का अर्थ भी दस पापों का हरण करने वाला होता है।
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