- 44–46 डिग्री के बीच पहुंचा पारा, तपती सड़कों पर सन्नाटा, घाटों पर पानी में राहत तलाशते लोग, गर्म हवाओं ने थाम दी शहर की रफ्तार
सुबह 10 बजे के बाद सड़कों पर कम हुई भीड़
लहुराबीर, गोदौलिया, कैंट, सिगरा और भेलूपुर जैसे व्यस्त इलाकों में दोपहर के समय आम दिनों की तुलना में कम आवाजाही देखी गई। बाइक सवार चेहरा ढंककर निकलते दिखाई दिए तो फुटपाथ पर काम करने वाले मजदूर पेड़ों की छांव तलाशते रहे। चौराहों पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी भी बार-बार पानी पीते दिखाई दिए। रिक्शा चालक राजू बताते हैं, दोपहर में सवारी ही नहीं मिल रही। लोग बाहर निकलने से बच रहे हैं। वहीं चाय विक्रेता का कहना था कि गर्म चाय की जगह लोग नींबू पानी, लस्सी और ठंडे पेय की मांग अधिक कर रहे हैं।
घाटों पर बढ़ी भीड़, पानी में तलाश रहे सुकून
भीषण गर्मी के बीच गंगा घाट लोगों का अस्थायी राहत केंद्र बनते दिखाई दिए। अस्सी, दशाश्वमेध और राजघाट पर दोपहर में युवाओं और श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी। कई लोग घंटों पानी में बैठकर गर्मी से राहत पाने की कोशिश करते रहे। घाटों पर नाविकों का कहना है कि सुबह और शाम के समय पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन दोपहर में तेज धूप के कारण गतिविधियां कम हो जाती हैं।
नौतपा क्या है और क्यों बढ़ती है तपिश?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब नौ दिनों की अवधि को नौतपा कहा जाता है। लोकमान्यता है कि इस दौरान धरती सबसे अधिक तपती है। मौसम विज्ञान की दृष्टि से यह वह समय होता है जब मानसून पूर्व वातावरण में अत्यधिक गर्मी जमा होती है।
आने वाले दिनों का अनुमान
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भीषण गर्मी और गर्म हवाओं का प्रभाव बने रहने की आशंका जताई है, हालांकि सप्ताह के उत्तरार्ध में स्थानीय बादल और प्री-मानसून गतिविधियां कुछ राहत दे सकती हैं।
हीट स्ट्रोक से ऐसे बचें
● दोपहर 12 से 4 बजे तक अनावश्यक बाहर न निकलें
● पानी, ओआरएस और तरल पदार्थ लगातार लेते रहें
● हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें
● बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें
● चक्कर, सिरदर्द या उल्टी की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें


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