- रील्स, कथा मंच, भजन संध्या और सोशल मीडिया पर छाया गीत; हर कलाकार गुनगुना रहा, लेकिन इसके असली रचनाकार को लेकर भी चर्चा तेज
- एक धुन, कई देवता: ‘जगन्नाथ’ से ‘हनुमान’ और ‘महाकाल’ तक, भक्ति की नई वायरल लहर
- सोशल मीडिया पर छाया एक सुर, लेकिन असली सवाल — धुन किसकी और पहचान किसकी?
हालांकि यहां एक दिलचस्प पहलू भी है। उपलब्ध जानकारियों के अनुसार “जगन्नाथ चका नैन” एक पारंपरिक भक्ति भाव से जुड़ा पद माना जा रहा है, जिसके अलग-अलग संस्करण समय-समय पर सामने आए हैं। कुछ संस्करणों में इसे पारंपरिक रचना बताया गया है, जबकि कई नए संगीतकारों और गायकों ने इसे नए संगीत संयोजन के साथ प्रस्तुत किया है। दरअसल, यह पहली बार नहीं है जब कोई भक्ति गीत अचानक जन-जन की आवाज बन गया हो। इससे पहले राम आएंगे, अच्युतम केशवम और हर हर शंभू जैसे गीतों ने भी ऐसी ही लोकप्रियता हासिल की थी। फर्क सिर्फ इतना है कि “जगन्नाथ चक्का नैन” ने लोगों के भीतर छिपे उस भाव को छुआ है, जिसमें संकट के समय इंसान किसी बड़े सहारे की तलाश करता है। शायद यही कारण है कि आज हर मंच पर एक ही आवाज सुनाई दे रही है— "तू न संभाले तो हमें कौन संभाले..." और यही एक पंक्ति इस गीत को वायरल ट्रेंड से आगे ले जाकर आस्था का स्वर बना रही है। अभी सोशल मीडिया पर एक ही धुन पर कई भक्ति संस्करण चल रहे हैं — “जगन्नाथ…”, “हनुमान…”, “महाकाल…”। वाराणसी के संकट मोचन संगीत समारोह में “हनुमान हनुमान राम के प्यारे, तू न संभाले तो मुझे कौन संभाले” और फिर “महाकाल महाकाल…” भारतीय भजन परंपरा में अक्सर एक लोकप्रिय धुन (ट्यून/मीटर) पर अलग-अलग देवी-देवताओं के नाम जोड़कर नए पद गाए जाते हैं। जैसे एक ही तर्ज पर राम, कृष्ण, शिव, हनुमान, जगन्नाथ संस्करण बनने लगते हैं। इसका अर्थ हमेशा यह नहीं होता कि जिसने बाद में गाया वही मूल रचनाकार भी है। “जगन्नाथ चका नैन” का वायरल संस्करण — बड़े पैमाने पर इंद्रेश जी महाराज के नाम से प्रसारित हो रहा है। “हनुमान…” और “महाकाल…” वाले संस्करण — संभव है कि वे उसी धुन पर मंचीय या स्वतंत्र प्रस्तुतियां हों। खास यह है कि इस गाने को नुरुला जसप्रीत ने संकट मोचन मंदिर में गाकर लोगों का दिल जीत लिया, जबकि अनुप जलोटा ने भी बड़े ही सधे अंदाज में इसे प्रस्तुत किया.

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें