- टीम संडे के सुकून ने पूरे किए निरंतर निशुल्क भोजन के 500 दिन
डॉक्टर, इंजीनियर और युवा व्यवसायियों की टोली
आमतौर पर आज के युवा सुबह देर से उठना पसंद करते हैं और संडे यानी रविवार का दिन अपने परिवार, मनोरंजन या घूमने-फिरने में बिताते हैं। लेकिन टीम संडे के सुकून की कहानी बिल्कुल जुदा है। इस टीम में डॉक्टर, इंजीनियर, और युवा व्यवसायी सहित अनेक समाजसेवी शामिल हैं, जिनकी हर सुबह की शुरुआत बिस्तर छोडऩे के साथ ही सेवा कार्यों से होती है। रविवार के दिन जब लोग अपने निजी जीवन में व्यस्त होते हैं, तब यह टीम पूरी ऊर्जा के साथ शहर हित और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की मदद में जुट जाती है।
तत्कालीन कलेक्टर और एसडीएम भी रह चुके हैं मुरीद
युवाओं के इस अनुशासित और निस्वार्थ जज्बे के सीहोर के आला अधिकारी भी कायल रहे हैं। सीहोर में पदस्थ रहे तत्कालीन कलेक्टर प्रवीण कुमार सिंह और तत्कालीन एसडीएम राजकुमार खत्री सहित अनेक प्रशासनिक अफसर अपने कार्यकाल के दौरान इस टीम के कार्यों और प्रबंधन के मुरीद रह चुके हैं। अधिकारियों ने समय-समय पर टीम के इस सेवा मॉडल की खुले दिल से सराहना की है।
जन्मदिन और पुण्यतिथि मनाने का बदला ट्रेंड
टीम संडे के सुकून ने शहरवासियों की सोच और उत्सव मनाने के तौर-तरीकों को भी बदला है। अब शहर के लोग अपने परिजनों के जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ या अपनों की पुण्यतिथि होटलों में उड़ाने के बजाय सेवा कार्य कर मनाते हैं। टीम ऐसे लोगों को एक बेहद सरल, पारदर्शी और अनुशासित प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराती है, जिससे लोग सीधे अस्पताल में परिजनों को भोजन कराकर अपने विशेष दिनों को यादगार बना रहे हैं।
गौ-सेवा, मोक्ष वाहन और बर्तन बैंक
जिला अस्पताल में निशुल्क भोजन के अलावा इस तपती दोपहरी और भीषण गर्मी में टीम ने बेजुबान पशुओं के लिए भी मोर्चा संभाला है। अपने गौभोजनम कार्यक्रम के अंतर्गत टीम द्वारा शहर के हर हिस्से में भोजन और जल कुंड रखे गए हैं। प्रतिदिन 'गौ सेवा वाहनÓ के माध्यम से गोग्रास (चारा-पानी) भरकर शहर के सैकड़ों गोवंश के कंठ और पेट की भूख मिटाई जा रही है। इसके साथ ही समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए टीम द्वारा मोक्ष वाहन संचालित किया जाता है, जो शोकाकुल परिवारों की सुविधा के लिए पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध रहता है। वहीं शहर में डिस्पोजल के उपयोग को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से टीम ने 'बर्तन बैंकÓ की भी स्थापना की है, जिससे शादियों और सामाजिक कार्यक्रमों में लोग डिस्पोजल छोड़ स्टील के बर्तनों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं। युवाओं की यह टोली आज सीहोर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए समाजसेवा, पर्यावरण संरक्षण और युवा शक्ति के सही सदुपयोग की एक मिसाल बन चुकी है।

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