- निजी तालाब विवाद में पत्रकार को घंटों थाने में बैठाने का आरोप,
- नगर निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल, तालाब मालिक बोले — “गलती प्रशासन की और सफाई आम जनता दे?”
अजय धारी सिंह ने आरोप लगाया कि करीब दो घंटे तक क्षेत्र भ्रमण और बातचीत के बाद जब नगर आयुक्त वापस चले गए, तो थोड़ी देर बाद पुलिस उनके घर पहुंच गई। पुलिसकर्मियों ने उन्हें और तालाब से जुड़े लोगों को थाना चलने को कहा। जब कारण पूछा गया, तो कथित तौर पर जवाब मिला — “डीएम साहेब का आदेश है।” उन्होंने बताया कि जब उन्होंने नगर आयुक्त Umesh Kumar Bharti से फोन पर बात की, तब भी उन्हें थाना जाकर अपनी बात रखने की सलाह दी गई। अजय धारी सिंह के अनुसार, Madhubani Town Police Station पहुंचने के बाद उनसे नाम, पता और पेशे की जानकारी ली गई। उन्होंने बताया कि पत्रकार होने की जानकारी देने के बाद थाना प्रभारी का रवैया कुछ बदला, लेकिन उनसे तालाब में काम करने वाले सभी लोगों का आधार और विवरण मांगा गया। उन्होंने कहा कि आधार की छायाप्रति तत्काल उपलब्ध नहीं होने के बावजूद उन्होंने सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने का भरोसा दिया, लेकिन इसके बाद भी उन्हें करीब ढाई घंटे तक थाने में बैठाए रखा गया।
अजय धारी सिंह ने प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी आम नागरिक की गलती है तो पहले नोटिस देकर जवाब मांगा जाना चाहिए। बिना स्पष्ट कारण घंटों थाने में बैठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन या नगर निगम के कर्मियों की गलती से समस्या उत्पन्न हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी आम लोगों पर नहीं डाली जानी चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “डीएम साहेब का समय जितना मूल्यवान है, जनता का समय भी उतना ही मूल्यवान है। जनता के सेवक को जनता की बात भी सुननी चाहिए।” इस पूरे घटनाक्रम के बाद मधुबनी में नगर निगम की कार्यप्रणाली, जलनिकासी व्यवस्था और प्रशासनिक रवैये को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश और बाढ़ से पहले शहर की नालियों और तालाबों की समुचित सफाई व योजना जरूरी है, ताकि आम नागरिकों को परेशानी न झेलनी पड़े।

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