- सड़क किनारे मौजूद किसानों की जमीनों को नया बटान डालकर किया पीछे, किसानों ने कलेक्टर से की कार्यवाही की मांग
किसानों ने कलेक्टर के दफ्तर में दी दस्तक
पीड़ित किसानों ने अब इस मामले में कलेक्टर के दफ्तर में दस्तक दी है पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कर किसानों की जमीन पुराने राजस्व के नक्शे खसरा नंबर के आधार पर ही यथावत करने और भू माफिया के इशारे पर सरपंच सचिव पटवारी आर आई के द्वारा बिना पूर्व सूचना नोटिस के बिना किए गए भूमि बटान को निरस्त करने की मांग की है। पूरे मामले को लेकर ग्राम पचामा के किसान भूमि स्वामी सेवानिवृत फौजी मनोज यादव, सुमन सरोठिया, डी. आर. सरोठिया, दिव्या गुरवानी, राजेश गुरबानी, सरोज शर्मा, मुरलीधर शर्मा,सहित अन्य किसानों का कहना है कि ग्राम पचामा के सर्वे खसरा नंबर 269 की सभी बटानो बदल दिया गया है। खासकर 269/11. 269/8. 269/7 को बदलकर आवदेनिक रूप से रजनीश विजयश्री सिंह गौर ने 269/1/2 कर लिया है। जबकि ऊपर बताए गए खसरा नंबरों पर क्रषको का वर्षों से स्वत्व एवं आधिपत्य चला आ रहा है।
झूठl पंचनामा, गलत तरीके से करवाया सीमांकन
वर्तमान में ग्राम पंचायत के सरपंच रजनीश गौर और उनके पति विजय सिंह गौर एवं सचिव द्वारा विना किसी पूर्व सूचना या विधिक नोटिस के, राजस्व अमले के साथ मिलकर गांव की जमीनों का गलत तरीके से सीमांकन करवाया गया। इस प्रक्रिया में 50 वर्ष पुराने स्थापित ग्रामीण रास्तों को बदलकर किसानों के खेतों के बीचों-बीच रात में मुरम डाल कर बनाया जाकर निकाला जा रहा है। सरपंच और पटवारी ने अपनी बात को सही साबित करने के लिए पड़ोसी कृषकों की सहमति और "पंचनामे" का उल्लेख पूर्णतः झूठे असत्य हस्ताक्षरों का उपयोग कर किया है। वास्तविकता यह है कि प्रभावित किसी भी किसान को न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही सीमांकन के समय किसान वहां उपस्थित रहे।
नियमों के विरुद्ध किया गया काम
सरपंच सचिव पटवारी ने मिली भगत से बिना किसी विधिक अनुमति के व्यक्तिगत खसरा नंबरों के बीचों-बीच चूना डालकर रास्ता चिन्हित किया, जो कि संपत्ति के अधिकारों का उल्लंघन है। पुराने रास्ते को विलोपित कर निजी खेतों के बीच में नया नक्शा बनाना भू-राजस्व नियमों के विरुद्ध है। किसानों ने कहा कि राजस्व नक्शे में की गई इस अवैध हेरा-फेरी से खेतो की मेड और सीमाएं खिसक गई हैं, जिससे ग्राम पचामा में भविष्य में बड़े विवाद और कानून-व्यवस्था की स्थिति निर्मित होने की प्रबल संभावना बनी हुई है।
हेराफेरी करने वालों को भेजो जेल
पीड़ित किसानों का कहना है कि हमारी बरसों से चली आ रही आधिपत्य की जमीन पर ही. मौके पर मौजूद वास्तविक कब्जे और पुराने राजस्व नक्शों के आधार पर हमारा पुनः मीमांकन कराया जावे और पैतृक भूमि सुरक्षिन किया जाकर राजस्व रिकॉर्ड और नक्शों की जांच करने के लिए एक निष्पक्ष टीम गठित कर समस्त किसानों की उपस्थिति में पुनः विधिवत सीमांकन कराया जाए और पुराने ग्रामीण रास्ते को यथावत रखा जाए और अवैध रूप किसानों की जमीनों पर क़िए जा रहे सड़क निर्माण को भी तत्काल रोका जाए साथ ही राजस्व रिकॉर्ड और जमीनी नक्शा से अवैधानिक छेड़छाड़ करने वाले लोगों पर भी कानूनी कार्यवाही की जाए।
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