- ग्राम महुआखेड़ी में विशाल एकादश कुण्डीय श्री रुद्रमहायज्ञ एवं शिव परिवार प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव

सीहोर। भगवान से सच्चा नाता जोड़ने वाला भक्त कभी अकेला नहीं रहता। जो एक बार भगवान को पकड़ लेता है, उसका साथ ईश्वर कभी नहीं छोड़ता। बीता हुआ समय वापस नहीं आता, इसलिए धर्म कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। भगवान की भक्ति करोगे शक्ति मिलेगी। जिस-जिस ने भगवान की भक्ति कर अपने जीवन को संवारा है उसने अपनी इस मानव देह को सार्थक किया है। आज शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में जिस तरह से मंदिरों का जीर्णोंद्धार यज्ञ संचालक 108 पंडित दुर्गाप्रसाद कटारे ने किए है। वह सभी आस्था का केन्द्र है। इसके लिए पंडित श्री कटारे पूरे सनातन धर्म के ताज है। ग्रामीण क्षेत्र में सनातन धर्म रक्षा, गौ रक्षा, एकता-अखंडता एवं मानव कल्याण के लिए हजारों की संख्या में श्री कटारे के द्वारा यज्ञ किए गए है। उक्त विचार विशाल एकादश कुण्डीय श्री रुद्र महायज्ञ शिव परिवार प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के तत्वाधान में गुरुवार को कथा वाचक पंडित राघव मिश्रा ने कहे। इस मौके पर यज्ञ के यजमानों ने स्वागत सम्मान किया। उन्होंने श्रद्धालुओं से महायज्ञ का पूर्ण लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि पंडित श्री कटारे ने बताया कि शुक्रवार को भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस भंडारे में भोजन के अलावा करीब आठ क्विंटल नुक्ति का भोग लगाकर प्रसादी का वितरण किया जाएगा। उन्होंने कहाकि भगवान शिव जन कल्याण के लिए तत्पर रहते है। महादेव का विष पीना त्याग, करुणा और नकारात्मकता को सोखकर संसार की रक्षा का प्रतीक है, उस मालिक की कृपा बनी रहे, इसलिए भगवान शिव के इस रूप का भी ध्यान रखना कि भगवान हैं नीलकण्ठ, भगवान शिव ने समुद्र मंथन के समय उत्पन्न हुए विष को अपने कण्ठ में धारण किया। उसमें से विष भी निकला था और अमृत भी निकला था। अमृत पीने वाले सब देव कहलाए, किन्तु दूसरी वस्तु यानी विष की कड़वाहट को पीने के लिए कोई भी तैयार नहीं हुआ। जिस कड़वाहट से पूरी धरती जल सकती है, नष्ट भी हो सकती थी, उस जहर को अपने मुख में लेकर कण्ठ में रखने का काम भगवान शिव ने किया। तो सब देव तो अमृत पीने के बाद सिर्फ देव कहलाये, लेकिन जिन्होंने दूसरों के हिस्से की कड़वाहट को पी लिया, देव नहीं अपितु देवों के भी देव यानी उन्हें महादेव कहा गया।
रामलीला में रात सीता हरण का मंचन हुआ
यज्ञ संचालक पंडित दुर्गाप्रसाद कटारे ने बताया कि रामलीला में रात सीता हरण का मंचन हुआ। मंचन में सुंदर झांकियों की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पंचवटी की कुटी में भगवान राम, सीता और लक्ष्मण को दिखाया गया। रावण की बहन सूर्पणखा ने राम और लक्ष्मण से विवाह की जिद की। लक्ष्मण ने उसकी नाक काट दी। इसके बाद सूर्पणखा ने रावण को घटना की जानकारी दी। मारीच सोने का हिरण बनकर कुटिया के पास आया। सीता के कहने पर राम हिरण का पीछा करने गए। घायल मारीच ने राम की आवाज में लक्ष्मण को पुकारा। सीता ने लक्ष्मण को राम की मदद के लिए भेजा। लक्ष्मण ने कुटिया के चारों ओर लक्ष्मण रेखा खींची। रावण ने साधु का रूप धारण कर सीता का हरण किया। जटायु और रावण के बीच युद्ध में जटायु की मृत्यु हो गई।
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