मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने कहा कि तीर्थयात्रियों एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है, तो यह किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि संज्ञान में आया है कि स्मार्ट सिटी द्वारा नमो घाट के संचालन एवं मेंटेनेंस का जिम्मा जिस एजेंसी को दिया गया है, वहां कथित तौर पर धन उगाही, दुर्व्यवहार और मारपीट की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों की गहन जांच आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। मंत्री ने निर्देश दिया कि जिस गार्ड या बाउंसर पर तीर्थयात्री की मौत का आरोप है, उसके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराते हुए कठोर और न्यायोचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और दोषियों को किसी भी परिस्थिति में संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। घटना के मानवीय पक्ष को देखते हुए मंत्री ने मृतक तीर्थयात्री के परिवार के लिए आर्थिक सहायता की भी घोषणा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मृतक के परिजनों को मानवीय संवेदना और सहयोग के दृष्टिकोण से पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता तत्काल उपलब्ध कराई जाए। नमो घाट की यह घटना लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। सुरक्षा व्यवस्था और निजी एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में मंत्री का सख्त रुख आने वाले दिनों में पूरे मामले की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा तय कर सकता है।
मंत्री के प्रमुख निर्देश
◆ नमो घाट संचालित करने वाली एजेंसी की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए
◆ दोषी पाए जाने पर संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए
◆ आरोपी गार्ड/बाउंसर पर एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई हो
◆ मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये की तत्काल सहायता दी जाए
◆ श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए
मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने कहा यह घटना केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि काशी की गरिमा और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो।

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