दरभंगा : अभियंत्रण महाविद्यालय में जल-संरचनाओं के जीर्णोद्धार पर कार्यशाला सम्पन्न - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

बुधवार, 6 मई 2026

दरभंगा : अभियंत्रण महाविद्यालय में जल-संरचनाओं के जीर्णोद्धार पर कार्यशाला सम्पन्न

Save-water-seminar-darbhanga
दरभंगा (संवाददाता)। अभियंत्रण महाविद्यालय में मंगलवार को “ जल जीवन हरियाली दिवस” कार्यक्रम के अंतर्गत “ सार्वजनिक जल-संरचनाओं का जीर्णोद्धार: चुनौतियाँ एवं अवसर ”विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पौधों को जल अर्पित कर पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में लघु जल संसाधन विभाग की सहायक अभियंता सुश्री मीनाक्षी भारती उपस्थित रहीं। संस्थान के प्राचार्य डॉ. चन्दन कुमार ने मुख्य अतिथि को अंगवस्त्र भेंट कर उनका स्वागत किया। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. आई. सी. ठाकुर ने अपने उद्बोधन में कहा कि पारंपरिक जल स्रोत—तालाब, कुएँ, आहर-पाइन—आज उपेक्षा, प्रदूषण और अतिक्रमण के कारण अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जल-संरचनाओं का जीर्णोद्धार केवल मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके संरक्षण, पुनर्भरण और सतत उपयोग को सुनिश्चित करना आवश्यक है। जल केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। मुख्य अतिथि सुश्री मीनाक्षी भारती ने अपने संबोधन में कहा कि सार्वजनिक जल-संरचनाओं पर बढ़ता अतिक्रमण गंभीर चिंता का विषय है, जिसे सरकार द्वारा चरणबद्ध तरीके से हटाकर इनका पुनर्जीवन किया जा रहा है। उन्होंने नए जल स्रोतों के निर्माण, अधिशेष जल वाले क्षेत्रों से जल की कमी वाले क्षेत्रों तक जल पहुंचाने तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से जल प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के प्रयासों की जानकारी दी। प्राचार्य डॉ. चन्दन कुमार ने अपने उद्बोधन में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर चिंता व्यक्त करते हुए इनके संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सतत विकास के लिए प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है। डीन डॉ. शशि भूषण ने प्राकृतिक संसाधनों के प्रति संवेदनशील बनने की प्रेरणा दी। अंत में डॉ. आई. सी. ठाकुर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया तथा मुख्य अतिथि को स्मृति-चिह्न भेंट कर कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन किया गया । कार्यक्रम में ई.ई.ई. विभागाध्यक्ष डॉ. अनामिका, प्रो. अंकेश कुमार , प्रो. अमित सहित अन्य प्राध्यापक एवं संस्थान के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और  जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया।

कोई टिप्पणी नहीं: