- एडवांस्ड ट्रांसओरल विधि का इस्तेमाल करके डॉक्टरों ने गर्दन में कोई चीरा लगाए बिना एक मुश्किल थायरॉइड कैंसर के मामले का इलाज किया। इससे मरीज़ जल्दी ठीक हो गया और उसे कोई ख़ास निशान नहीं पड़ा।
इस प्रक्रिया पर और ज्यादा जानकारी साझा करते हुए रीजेंसी हेल्थ कानपुर के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ जितिन यादव ने कहा, “तकनीकी रूप से यह एक मुश्किल केस था क्योंकि मरीज़ की पहले ही सर्जरी हो चुकी थी और उसे पूरी तरह से थायरॉइडेक्टॉमी की ज़रूरत थी। TOETVA से हम गर्दन में चीरा लगाने से पूरी तरह बचते हुए बचे हुए थायरॉइड टिशू को सुरक्षित रूप से निकाल पाए। इस तरह की तकनीक ज़्यादा मरीज़ केंद्रित सर्जिकल देखभाल में एक बड़े बदलाव को दिखाती हैं, जहाँ हम मरीज़ पर कम प्रत्यक्ष निशान के साथ बेहतर क्लीनिकल नतीजे पा सकते हैं। उन्होंने आगे बताते हुए कहा, “TOETVA जैसी कम चीर-फाड़ वाली विधियाँ थायरॉइड सर्जरी के तरीके को बदल रही हैं। ये न केवल बीमारी के इलाज में असरदार हैं, बल्कि इनसे शरीर पर निशान कम बनता है। इसलिए यह कई मरीज़ों के लिए बहुत मायने रखता है। सही योजना और विशेषज्ञ देखभाल की मदद से हम कैंसर का प्रभावी ढंग से इलाज कर सकते हैं और सर्जरी के बाद मरीज़ के जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर बना सकते हैं।” बिना किसी मुश्किल के सर्जरी सफलतापूर्वक हुई। सर्जरी के बाद मरीज़ की रिकवरी बहुत अच्छी रही। पैराथाइरॉइड हार्मोन और कैल्शियम का स्तर स्थिर है। यह इस बात के महत्वपूर्ण संकेत हैं कि थायरॉइड सर्जरी के बाद शरीर कैल्शियम को कितनी अच्छी तरह नियंत्रित कर रहा है। नियमित फॉलो-अप के तहत मरीज़ की स्थिति लगातार अच्छी बनी हुई है। डॉ. यादव ने एनेस्थीसिया और ऑपरेशन थिएटर टीम के सहयोग को भी सराहा, क्योंकि उन्हीं के आपसी तालमेल ने इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने में अहम भूमिका निभाई। यह उपलब्धि दर्शाती है कि कानपुर में एडवांस्ड और कम चीर-फाड़ वाली सर्जरी अब ज़्यादा हो रही है। यह रीजेंसी हेल्थ की उस प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है, जिसके तहत वह आधुनिक और मरीज़-केंद्रित देखभाल प्रदान करता है जो इलाज के परिणामों और मरीज़ों के जीवन की गुणवत्ता दोनों को बेहतर बनाती है।

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