सीहोर : पांच किलोमीटर उत्साह के साथ चले शिव भक्त श्रद्धालु - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 8 मई 2026

सीहोर : पांच किलोमीटर उत्साह के साथ चले शिव भक्त श्रद्धालु

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सीहोर। जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम महुआखेड़ी में सात दिवसीय विशाल एकादश कुण्डिय श्री रुद्र महायज्ञ शिव परिवार प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के तत्वाधान में आस्था और उत्साह के साथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर देर रात्रि को शहर के जगदीश मंदिर से ग्राम महुआखेड़ी तक भव्य शोभा यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में शहरी और ग्रामीण श्रद्धालु शामिल थे। शोभा यात्रा की शुरूआत मंदिर स्थित परिसर में भगवान के अभिषेक के साथ की गई। शोभा यात्रा का शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में अनेक स्थानों पर स्वागत किया। शहर के जगदीश मंदिर पर संस्कार मंच की ओर से धर्मेन्द्र माहेश्वरी, मनोज दीक्षित मामा, महेश कुमार, संतोष सिंह, आयुष गुप्ता ने यज्ञ संचालक पंडित दुर्गाप्रसाद कटारे, मुख्य यजमान सुरेश गब्बर परमार, देवनारायण परमार, महेन्द्र परमार, जसरथ परमार, रामचरण परमार, रतन परमार, शेर सिंह परमार, अशोक कुशवाहा, मनोहर, चंदर, मधो सिंह, सुरज सिंह, स्वरूप सिंह, लाडसिंह, पुरुषोत्तम, भगवान सिंह विक्रम परमार आदि का स्वागत किया। इस संबंध में जानकारी देते हुए यज्ञाचार्य पंडित दुर्गाप्रसाद कटारे ने बताया कि सात दिवसीय शिव परिवार प्राण-प्रतिष्ठ महोत्सव में एकादश कुण्डिय श्री रुद्र महायज्ञ सुबह से देर शाम तक होता था, वहीं श्री महाकालेश्वर रामायण प्रचारक रामलीला मंडल के तत्वाधान में रामलीला का मंचन किया जाता था।


मंदिर परिसर में आयोजित रामलीला में कलाकारों ने अशोक वाटिका और लंका दहन लीला का मंचन किया। इस दौरान हनुमान जी के पराक्रम और माता सीता की खोज के प्रसंगों को जीवंत किया गया। मंचन की शुरुआत में, वानर राज सुग्रीव ने राजपाट मिलने के बाद जामवंत और हनुमान को माता सीता की खोज के लिए दक्षिण दिशा में भेजा। विशाल समुद्र तट पर उनकी मुलाकात गिद्धराज के भाई संपाति से हुई, जिन्होंने बताया कि सौ योजन समुद्र लांघने वाला ही माता सीता का पता लगा पाएगा। यह सुनकर सभी वानर एक-दूसरे का मुंह देखने लगे। तब जामवंत जी ने हनुमान जी को उनकी शक्तियों का स्मरण कराया। अपनी शक्ति का भान होते ही हनुमान जी ने विशाल समुद्र को लांघने का संकल्प लिया और लंका की ओर प्रस्थान किया। लंका में प्रवेश करने के बाद, हनुमान जी विभीषण के महल में पहुंचे, जहां विभीषण ने उनका आदर-सत्कार किया और बताया कि माता सीता अशोक वाटिका में हैं। हनुमान जी अशोक वाटिका पहुंचे और एक पेड़ पर बैठकर दु:खी अवस्था में माता सीता को देखा। उन्होंने निशानी के तौर पर लाई गई भगवान राम की अंगूठी माता सीता के सामने डाल दी।


अंगूठी देखकर माता सीता को हनुमान जी पर विश्वास हो गया

हनुमान जी ने स्वयं को रामदूत बताते हुए माता सीता को विश्वास दिलाया कि वे उनकी सुध लेने आए हैं। अंगूठी देखकर माता सीता को हनुमान जी पर विश्वास हो गया। इसके बाद, भूख लगने पर हनुमान जी ने माता सीता की आज्ञा लेकर फल खाए और अशोक वाटिका के वृक्षों को तोड़ना शुरू कर दिया। वृक्षों के तोड़े जाने की सूचना जब दशानन रावण तक पहुंची, तो उन्होंने अपने पुत्र मेघनाद को हनुमान जी को बंदी बनाने के लिए भेजा। हनुमान जी को बंदी बनाकर दरबार में लाया गया, जहां मंत्रियों की सलाह पर उनकी पूंछ में आग लगवा दी गई। पूंछ में आग लगने के बाद हनुमान जी ने दशानन रावण की सोने की लंका को जलाकर राख कर दिया।

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