पटना : कृषि अनुसंधान परिसर में IoT-सक्षम मृदा निगरानी प्रणाली का उद्घाटन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 27 मई 2026

पटना : कृषि अनुसंधान परिसर में IoT-सक्षम मृदा निगरानी प्रणाली का उद्घाटन

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पटना (रजनीश के झा), 27 मई। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना ने बीआईटी मेसरा के सहयोग से एक स्वदेशी IoT आधारित मृदा निगरानी प्रणाली विकसित की है, जिसका उद्घाटन 27 मई 2026 को किया गया। यह पहल स्मार्ट एवं जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने तथा क्षेत्र में जल प्रबंधन को अधिक कुशल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट, सिंचाई की बढ़ती लागत तथा जल के असंतुलित उपयोग जैसी प्रमुख कृषि चुनौतियों को ध्यान में रखकर विकसित की गई है। पूर्वी भारत में छोटे एवं बिखरे हुए खेतों तथा मृदा नमी की वास्तविक समय जानकारी के अभाव में अक्सर आवश्यकता से अधिक सिंचाई की जाती है, जिससे जल की बर्बादी, कम जल उत्पादकता तथा मृदा क्षरण जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। इस परियोजना के अंतर्गत लोरा वैन तकनीक आधारित मृदा नमी निगरानी प्रणाली विकसित की गई है, जो खेत से वास्तविक समय में मृदा नमी संबंधी आंकड़े उपलब्ध कराती है। इससे किसानों को आवश्यकता के अनुसार सिंचाई करने में सहायता मिलेगी, जिससे जल की बचत, ऊर्जा लागत में कमी तथा सिंचाई दक्षता में वृद्धि होगी। संस्थान के निदेशक डॉ अनुप दास  ने इस पहल को “स्मार्ट फार्म” की दिशा में एक महत्वपूर्ण और समयोचित कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह तकनीक जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ कृषि उत्पादन प्रणाली को अधिक टिकाऊ, आधुनिक और संसाधन-कुशल बनाने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान किसानों के लिए किफायती, उपयोगी एवं क्षेत्र विशेष के अनुरूप तकनीकों के विकास हेतु प्रतिबद्ध है।


इस अवसर पर डॉ. आशुतोष उपाध्याय, प्रभागाध्यक्ष, भूमि एवं जल प्रबंधन ने बताया कि यह प्रणाली मृदा नमी की वास्तविक समय में निगरानी करने में सक्षम है, जिससे सिंचाई केवल आवश्यकता पड़ने पर ही की जा सकेगी। इससे जल की बर्बादी कम होगी तथा सिंचाई जल उपयोग दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा। यह पहल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना एवं बी आई टी  मेसरा, पटना परिसर के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के अंतर्गत विकसित की गई है। वर्तमान में विकसित प्रणाली का फील्ड स्तर पर परीक्षण, कैलिब्रेशन एवं प्रदर्शन मूल्यांकन किया जा रहा है, ताकि इसकी सटीकता, विश्वसनीयता तथा किसानों के बीच व्यापक उपयोग की संभावनाओं का आकलन किया जा सके। कार्यक्रम में 50 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें वैज्ञानिक, कर्मचारी तथा आईएआरआई पटना हब के छात्र शामिल थे। इस अवसर पर दो हिंदी पुस्तकों—“कृषि में IoT : आधुनिक कृषि की तरफ बढ़ते कदम” तथा “किसानों के लिए ड्रोन संचालन मार्गदर्शिका”—का भी विमोचन किया गया। यह पहल जलवायु-सहिष्णु एवं सतत कृषि विकास को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है तथा पूर्वी भारत में स्मार्ट सिंचाई, कुशल जल प्रबंधन और टिकाऊ कृषि को नई दिशा प्रदान करेगी।

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