कार्यक्रम के दौरान उपस्थित प्रतिभागियों को महिला सुरक्षा, घरेलू हिंसा की रोकथाम, बाल विवाह निषेध, दहेज प्रथा उन्मूलन, शिक्षा का महत्व, स्वास्थ्य एवं पोषण, वित्तीय साक्षरता तथा आत्मनिर्भरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। इस अवसर पर जिला हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वीमेन (DHEW) के लैंगिक विशेषज्ञ शिवराम मेहरा द्वारा महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा करते हुए महिलाओं को उनके संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों की जानकारी दी गई। उन्होंने पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाले “सहयोग शिविर” की उपयोगिता बताते हुए कहा कि इन शिविरों के माध्यम से महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं से जोड़ने का कार्य किया जाता है। उन्होंने महिलाओं को समाज में समान भागीदारी निभाने तथा शिक्षा एवं आत्मनिर्भरता को अपनाने के लिए प्रेरित किया। वन स्टॉप सेंटर (OSC) मधुबनी की केस वर्कर बीना चौधरी द्वारा वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से महिलाओं को उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं की जानकारी दी गई। उन्होंने घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना एवं अन्य प्रकार के उत्पीड़न से पीड़ित महिलाओं को मिलने वाली कानूनी सहायता, चिकित्सा सहायता, मनोसामाजिक परामर्श एवं अस्थायी आश्रय जैसी सुविधाओं के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही महिलाओं को अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने एवं सहायता प्राप्त करने के लिए आगे आने हेतु प्रेरित किया।
इसी क्रम में वन स्टॉप सेंटर झंझारपुर की मनोसामाजिक परामर्शी दीपशिखा सिंह द्वारा महिला सुरक्षा, घरेलू हिंसा, बाल विवाह निषेध अधिनियम तथा महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा हेतु संचालित विभिन्न हेल्पलाइन एवं टोल फ्री नंबरों की जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा, उत्पीड़न या भेदभाव की स्थिति में महिलाएँ बिना डर के संबंधित विभागों एवं हेल्पलाइन सेवाओं का उपयोग कर सकती हैं। कार्यक्रम में DHEW की वित्तीय साक्षरता विशेषज्ञ पूनम कुमारी द्वारा महिलाओं एवं किशोरियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण एवं वित्तीय साक्षरता के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। उन्होंने महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं, बचत, स्वरोजगार एवं सरकारी वित्तीय योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं एवं किशोरियों ने खुलकर अपनी समस्याएँ एवं अनुभव साझा किए। संबंधित विभागों के कर्मियों द्वारा उनकी समस्याओं के समाधान हेतु आवश्यक सुझाव एवं मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने “सखी वार्ता” जैसी पहल की सराहना करते हुए इसे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की जागरूकता एवं सशक्तिकरण की दिशा में अत्यंत उपयोगी बताया। “सखी वार्ता” कार्यक्रम ने ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं एवं किशोरियों में आत्मविश्वास बढ़ाने, सामाजिक जागरूकता फैलाने तथा उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाने की दिशा में एक सकारात्मक एवं प्रभावी पहल प्रस्तुत की।

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