डाॅ.गदिया ने अपने सम्बोधन में कहा कि युवाओं को आज नौकरियां मिलें, यह तो जिंदगी का एक सफल मकसद हो सकता है मगर देश और समाज के लिए युवाओं को प्रेरित कर सकें, यह एक शिक्षक का काम है। मेवाड़ ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस इसी भावना को मिशन के रूप में लेकर निरंतर कार्यरत है। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर मुस्लिम विरोधी कतई नहीं थे। वह 200 सबजातियों में बंटी हिन्दू संस्कृति के खिलाफ थे। इस संस्कृति को संगठित करना ही उनका मकसद था। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सावरकर के अधूरे सपने के एकांश को पूरा करने में सफलता अर्जित की है। उन्होंने आगे कहा कि अपनी समस्या खुद ही हल करनी होगी। मेवाड़ में भी एक इंडिया हाउस है, जिसमें महापुरुषों की जयंतियों के अलावा देश व समाज को आगे बढ़ाने वाले कार्यों को करना अपना नैतिक कर्तव्य समझा जाता है। डाॅ.गदिया ने वीर सावरकर के जीवन के अनेक संदर्भों को शब्दचित्र के जरिये रेखांकित किया। समारोह में इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डाॅ. अलका अग्रवाल ने कहा कि यातनाएं सहने से कभी नहीं डरना चाहिए। यातनाएं सहने वाला लम्बी आयु जीता है। वीर सावरकर का जीवन इसका एक सशक्त उदाहरण है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी जीना सीखा और दूसरों को जीने की प्रेरणा दी। उन्होंने एक रोचक संदर्भ से इस बात की पुष्टि की। इससे पूर्व मेवाड़ के चेयरमैन डाॅ. गदिया एवं निदेशिका डाॅ. अलका अग्रवाल ने वीर सावरकर, शारदे मां व भारत माता के चित्र के समक्ष दीप जलाया और पुष्प अर्पित कर अपनी भावांजलि दी। समारोह में विनय सक्सेना ने सरस्वती वंदना, गौरव व प्रियांशु ने कविता, सलमान, महिमा व सीमा ने वीर सावरकर पर आधारित अपने विचार व्यक्त किये। एक वीडियो के जरिये सावरकर जी के जीवन आदर्शों को दर्शाया गया। समारोह का सफल संचालन अमित पाराशर ने किया। इस अवसर पर मेवाड़ ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस का समस्त स्टाफ मौजूद रहा।
गाजियाबाद (रजनीश के झा)। मेवाड़ ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस के पीडीपी हाल में आयोजित वीर सावरकर जयंती समारोह में देशभक्तिपूर्ण कविताओं व सम्भाषणों ने खूब समां बांधा। शिक्षक-शिक्षिकाओं ने वीर सावरकर के जीवन पर आधारित अनेक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस अवसर पर इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डाॅ. अशोक कुमार गदिया ने कहा कि हम हाय-हेलो की संस्कृति को छोड़कर जय हिन्द कहें। उन्होंने कहा कि हम रोजाना मौत से डरना बंद करें। मृत्यु पर विजय पाना सीखें। कायरता का जीवन त्यागकर देश व समाज को आगे बढ़ाने की बात करें। तभी हम सच्चे अर्थों में वीर सावरकर की जयंती मनाने में सफल हो पाएंगे।

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