वाराणसी : 18 मिनट का कहर : आंधी ने उजाड़े 15 घर - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 14 मई 2026

वाराणसी : 18 मिनट का कहर : आंधी ने उजाड़े 15 घर

  • 80 किमी की रफ्तार से चली हवाओं ने मचाई तबाही, पेड़-दीवार-पोल बने काल; मासूम बेटियों समेत एक ही परिवार के चार लोगों की मौत

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भदोही/वाराणसी (सुरेश गांधी). जिलेभर में बुधवार की शाम ऐसा मंजर देखा, जिसने जिले को दहला दिया। दिनभर की भीषण गर्मी के बाद लोग राहत की बारिश का इंतजार कर रहे थे, लेकिन शाम साढ़े पांच बजे आसमान से राहत नहीं, मौत उतरी। देखते ही देखते तेज हवाओं ने विकराल रूप ले लिया। करीब 80 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी ने महज 18 मिनट में पूरे जिले को तबाही के मलबे में बदल दिया। कहीं विशाल पेड़ धराशायी हुए, कहीं दीवारें भरभराकर गिर पड़ीं, तो कहीं बिजली के पोल लोगों पर मौत बनकर टूट पड़े। चीख-पुकार, अंधेरा और अफरा-तफरी के बीच जिलेभर में 15 लोगों की जिंदगी हमेशा के लिए थम गई। 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए।


एक ही घर से उठीं चार अर्थियां, गांव रो पड़ा

सबसे दर्दनाक तस्वीर सुरियावां क्षेत्र के अभोली ब्लॉक स्थित खड़गसेन गोकुलपट्टी गांव से सामने आई। तेज आंधी के दौरान अचानक एक भारी पेड़ परिवार पर आ गिरा। हादसे में अशोक कुमार की पत्नी सुधा और उनकी तीन मासूम बेटियां — आरुषि, आरुही और जूही — हमेशा के लिए दुनिया छोड़ गईं। घर का आठ वर्षीय आदर्श जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। उसे गंभीर हालत में बीएचयू ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। गांव में जब एक साथ चार शव घर पहुंचे तो हर आंख नम हो गई। पूरे गांव में सन्नाटा पसरा रहा।


नमाज के दौरान टूटी दीवार, छप्पर के नीचे दबा जीवन

दुर्गागंज थाना क्षेत्र के रामपुर हरनाम गांव में राम हौसला बिंद घर के बाहर छप्पर के नीचे बैठे थे। अचानक आम का विशाल पेड़ टूटकर उनके ऊपर गिर पड़ा। लोगों ने उन्हें निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उधर सुरियावां के झींगतपुर में मस्जिद के भीतर नमाज पढ़ रहे शमसुद्दीन पर दीवार गिर गई। इबादत के बीच आई मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया।


कहीं दीवार बनी मौत, कहीं बिजली का पोल

भदोही शहर के जमुंद मोहल्ले में आसमा बेगम छत पर कपड़े उतारने गई थीं। तेज हवाओं के दबाव से दीवार अचानक भरभराकर गिर गई और वह मलबे में दब गईं। चौरी थाना क्षेत्र के चांदी गहना गांव में 10 वर्षीय विवेक गौंड बिजली का पोल गिरने की चपेट में आ गया। गोपीगंज के कुलमनपुर गांव में 80 वर्षीय सवारी देवी घर के बाहर बैठी थीं, तभी नीम का पेड़ उन पर गिर पड़ा। औराई क्षेत्र के सरौली गांव में धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने गई तीन महिलाओं — लालती देवी, गीता देवी और राजकुमारी यादव — की पेड़ गिरने से मौत हो गई।


बिजली गुल, रेलवे ठप, सड़कों पर तबाही

आंधी का असर केवल जनहानि तक सीमित नहीं रहा। जिलेभर में 70 से अधिक पेड़ उखड़ गए। दर्जनों बिजली के खंभे टूट गए। कई हाईटेंशन टॉवर जमीन पर आ गिरे। पूरा जिला अंधेरे में डूब गया। ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन पर रेलवे ट्रैक के ऊपर लगा 25 हजार वोल्ट का विद्युत तार नीम का पेड़ गिरने से टूट गया। कई ट्रेनें रास्ते में रोकनी पड़ीं। प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। रामपुर घाट और नेवढ़िया के पीपा पुल भी तेज हवाओं की चपेट में आकर बह गए। गांवों का संपर्क टूट गया।


मौसम विभाग की चेतावनी सच साबित हुई

विशेषज्ञों के अनुसार बीते दो दिनों में तापमान में अचानक वृद्धि और वायुमंडलीय दबाव में बदलाव के कारण यह तूफानी स्थिति बनी। गर्म हवाओं और नमी के टकराव ने आंधी को खतरनाक रूप दे दिया। हालांकि तूफान कुछ मिनटों में गुजर गया, लेकिन पीछे छोड़ गया मातम, उजड़े घर और दर्द से भरी चीखें। भदोही की यह शाम अब सिर्फ मौसम की घटना नहीं, बल्कि उन परिवारों की जिंदगी का सबसे भयावह अध्याय बन चुकी है, जिनके अपने इस तूफान में हमेशा के लिए बिछड़ गए।

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