पटना : 'खेत बचाओ अभियान' से बदलेगी खेती की तस्वीर, किसानों की तकदीर : कृषि मंत्री - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 1 जून 2026

पटना : 'खेत बचाओ अभियान' से बदलेगी खेती की तस्वीर, किसानों की तकदीर : कृषि मंत्री

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पटना (रजनीश के झा), 01 जून। बिहार में मिट्टी की सेहत सुधारने, रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने तथा किसानों को वैज्ञानिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ने के उद्देश्य से सोमवार को कृषि भवन, मीठापुर (पटना) से राज्यव्यापी "खेत बचाओ अभियान" का शुभारंभ किया गया। यह अभियान 1 जून से 30 जून तक पूरे राज्य में चलाया जाएगा। कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार के माननीय कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने किया। इस अवसर पर कृषि मंत्री सहित उपस्थित किसानों, कृषि वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों ने संकल्प लिया कि वे अपने खेत की कम-से-कम 25 प्रतिशत भूमि पर प्राकृतिक खेती अपनाने का प्रयास करेंगे। कृषि मंत्री ने कहा कि यह अभियान खेती की तस्वीर और किसानों की तकदीर बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं, इसलिए प्राकृतिक खेती और संतुलित पोषण प्रबंधन को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने किसानों से मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर उर्वरकों के उपयोग तथा "कम खाद, सही खाद और सही सलाह" के सिद्धांत को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल यूरिया या डीएपी पर निर्भर रहने के बजाय नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग जरूरी है। साथ ही जैव उर्वरक, कंपोस्ट, गोबर खाद और हरी खाद के प्रयोग से मिट्टी की सेहत लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकती है।


कृषि मंत्री ने किसानों को धान की सीधी बुआई  (डीएसआर) तकनीक अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि इससे श्रम, समय और सिंचाई जल की बचत होती है तथा उत्पादन लागत कम होती है। उन्होंने कहा कि गोबर, गोमूत्र, जीवामृत, घनजीवामृत एवं बीजामृत आधारित प्राकृतिक खेती मिट्टी की जैविक सक्रियता बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित खाद्यान्न उत्पादन में भी सहायक है। कार्यक्रम में उपस्थित कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग, मृदा परीक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, फसल अवशेष प्रबंधन तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के संबंध में जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने बताया कि डीएपी एवं अन्य उर्वरकों का उपयोग अनुशंसित मात्रा में ही किया जाना चाहिए तथा मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार पोषक तत्वों का प्रबंधन करना चाहिए। उन्होंने किसानों को धान, मक्का एवं अन्य फसलों में वैज्ञानिक पोषण प्रबंधन अपनाने की सलाह दी। कार्यक्रम में कृषि विभाग के प्रधान सचिव श्री नर्मदेश्वर लाल; संयुक्त निदेशक (रसायन, कम्पोस्ट एवं बायोगैस), अपर निदेशक (रसायन), डॉ. अनुप दास, निदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना; कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के प्रमुख,; अटारी पटना के प्रतिनिधि,  कृषि निदेशक, बिहार तथा कृषि विभाग एवं विभिन्न संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

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