- कन्हैया ने जैसे ही माखन खाया घंटियां बज उठी

सीहोर। सोमवार रात हिंगलाज माता मंदिर कस्बा में भावसार समाज महिला मंडल के द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाऐं और गिरीराज पूजन छप्पन भोग प्रसंग सूनाते हुए भागवत भूषण पंडित रवि शंकर तिवारी ने श्रद्धालुओंं के समक्ष कहा कि प्रभू जिसे पकड़ लेते है फिर छोड़ते नहीं है और भगवान के समक्ष छल कपट किसी का चलता नहीं है। राक्षसी सूपनखा ने भगवान श्रीराम के समक्ष और पूतना ने भगवान कृष्ण के समक्ष रूप बदलकर छल कपट किया था प्रभू ने सूपनखा को दंड दिया था और पूतना के प्राण हर लिए थे। परमात्मा के स्पर्श से असुर दानव भी मौक्ष प्राप्त करते है। भक्त के लिए भगवान हमेशा तत्पर रहते है। यशोदा के लाल का नामकरण गर्गाचार्य ने गौशाला में किया था भगवान का नाम कृष्ण रखा था भगवान गौ प्रेमी थे अब आधुनिक लोग बच्चों का नामकरण होटल में कर रहे है जिस से बच्चे बाटल प्रेमी हो रहे है। भागवत भूषण पंडित रवि शंकर तिवारी ने कहा कि यशोदा के घर में नो लाख गाय थी इस लिए गांव को गौकुल कहा जाता था अब गांवों में भी गाय पालना मुश्किल हो गया है शहरों में गाय सड़कों पर विचारण कर रही है। गाय के नाम पर देश में सबकुछ हो रहा है किंतू गाय को बचाना मुश्किल हो गया है गाय को सनातनियों के लिए राष्ट्रीय पशु घौषित करना चाहिए। बाल लीलाऐं सुनाते हुए तिवारी ने कहा कि भगवान बाल गौपाल गौकुल के घरों में गोपियों के यहा माखन खाते नहीं है केवल चुराते है और मटकियां फोड़ते है और माखन मित्रों को खिलाते है। पदमावति की कथा सुनाते हुए तिवारी ने कहा कि पदमा के घर में कन्हैया ने जैसे ही माखन खाते घंटियां बज उठती है भगवान ने घंटियों को नहीं बचने के लिए निर्देशित किया था लेकिन कन्हैया के माखन चखते ही घंटियां बचने लगती है घंटियां कहती है की प्रभू माखन प्रसाद खाए और घंटियां नहीं बचे या हो नही सकता है।
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