दिल्ली : फायरिंग में महिला की मौत के मामले में बिहार के भाजपा विधायक दोषी करार - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 6 जून 2026

दिल्ली : फायरिंग में महिला की मौत के मामले में बिहार के भाजपा विधायक दोषी करार

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दिल्ली/पटना । एक अदालत ने शनिवार को बिहार के साहिबगंज से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक राजू कुमार सिंह को फतेहपुर बेरी स्थित एक फार्महाउस में नव वर्ष की पार्टी के दौरान हर्ष फायरिंग करने के दौरान हुई मौत के मामले में गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया। इस घटना में एक महिला की मौत हो गई थी। अदालत ने सिंह की पत्नी और दो अन्य लोगों को सामान्य इरादे से हत्या करने और सबूत नष्ट करने के आरोपों से बरी कर दिया।  विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने सिंह को तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग दो (गैर इरादतन हत्या) और शस्त्र लाइसेंस संबंधी नियमों का उल्लंघन करने के लिए शस्त्र अधिनियम के प्रावधान के तहत दोषी ठहराया।


सजा पर बहस के लिए अगली सुनवाई नौ जून को होगी। अदालत ने 97 पृष्ठों के आदेश में कहा, “त्यौहारों के दौरान हर्ष फायरिंग हमारे देश में एक अभिशाप है, जिससे अक्सर मौतें होती हैं। यह मामला भी इसी तरह की एक घटना का उदाहरण है, जिसमें बिहार के कई बार विधायक रह चुके आरोपी राजू कुमार सिंह द्वारा कथित तौर पर लापरवाही से की गई ‘फायरिंग’ के कारण 31 दिसंबर 2018 और एक जनवरी 2019 की दरमियानी रात को नव वर्ष की पार्टी में पहुंची एक अतिथि की मौत हो गई।”  अदालत ने कहा कि अन्य आरोपियों ने इस घटना से संबंधित साक्ष्यों को कथित तौर पर गायब कर दिया। अदालत ने मौजूद साक्ष्यों पर विचार करते हुए कहा कि यह सिद्ध हो गया है कि सिंह ने ही वह गोली चलाई थी, जिससे अर्चना गुप्ता की मौत हुई और उनकी पहचान कई गवाहों ने की है। अदालत ने कहा कि सिंह ने अपनी पिस्तौल से कई गोलियां चलाईं, जो ‘स्पष्ट रूप से खतरनाक कृत्य’ है और आस-पास मौजूद कई लोगों के बीच हर्ष फायरिंग से यह संभावना थी कि गोली उन लोगों को लग सकती है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि सिंह ने आधी रात के आसपास 0.22 बोर की पिस्तौल से कई बार गोलियां चलाईं और एक गोली से अर्चना गुप्ता की मौत हो गई। राजू कुमार सिंह (56) पहले जनता दल यूनाइटेड, लोक जनशक्ति पार्टी और विकासशील इंसान पार्टी के सदस्य रह चुके हैं। अदालत ने गौर किया कि उनकी पत्नी रेनू सिंह पर आरोप है कि उन्होंने नृत्य करने के लिए बनाए गए मंच से मृतका का खून साफ ​​कर सबूत मिटा दिए, साथ ही इस्तेमाल किए गए कारतूस अपने पति को दिए और उन्हें मौके से भाग जाने के लिए कहा। अदालत ने यह भी गौर किया कि रामेंद्र सिंह और राणा राजेश सिंह ने भी अपने साझा इरादे से मृतक का खून मंच से साफ करके अपराध के सबूत मिटा दिए। अदालत ने उन्हें बरी करते हुए दोषी ठहराने वाले सबूतों की अनुपस्थिति का हवाला दिया और कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा है।

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