- मोदी सरकार के 12 साल के नाकामियों पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा जनता विष पीने को मजबूर
- मोदी सरकार के नाकामियों के 12 साल पर गरजे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम, कहा जनता को कब मिलेंगे अच्छे दिन?
महंगाई को कम करने दावे वादों के बीच लोकलुभावन घोषणाएं सभी को याद होंगी लेकिन अब वें यादों में ही रह गई हैं। अच्छे दिन आने वाले हैं का वादा करके देश को सबसे बुरे दिन में पहुंचा दिया गया। घरेलू सिलेंडर जो 2014 में जहां ₹410 वो आज 2026 में ₹1100 से ज्यादा हो चुका है। पेट्रोल और डीजल जहां ₹100 पार कर चुका है ऐसे में आम इंसान कैसे महंगाई से बचा, यह सरकार को बताना चाहिए। नोटबंदी से काला धन खत्म करने की वकालत करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी थोपा और उस नोटबंदी के कारण कितने छोटे व्यवसायी और आम जनता की कमर टूट गई, जो अब तक संघर्ष करते नजर आते हैं। कहा गया कि नोटबंदी से आतंक और आतंकियों की फंडिंग रुकेगी जबकि 99.3% नोट वापस RBI को वापस आ गए और आतंकी घटनाओं में कोई कमी नहीं आई। उल्टे यह बढ़ते ही गए। नोटबंदी से 15 लाख नौकरियां चली गई और देश की GDP में 2% की गिरावट दर्ज हुई। स्वास्थ्य सेवाओं पर 2025 तक GDP का 2.5% स्वास्थ्य पर खर्च की बात थी लेकिन 2025-26 में केवल 1.9% तक ही खर्च हो रही है। कैग की रिपोर्ट में बिहार को स्वास्थ्य सेवाओं में फिसड्डी राज्य घोषित किया गया लेकिन सरकार ने अब तक हमारे राज्य का भी ख्याल नहीं रखा। वर्तमान सरकार पर हमला बोलते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि आम व्यापारियों को कभी नोटबंदी तो कभी जीएसटी थोपकर तो कभी सोना नहीं खरीदने की अपील करके नरेंद्र मोदी सरकार ने बर्बाद करने का काम किया है। छोटे व्यापारियों के लिए यह सरकार तानाशाही रवैया अपनाती है लेकिन बड़े व्यापारिक घरानों में अपने मित्र अदाणी और अंबानी सहित अन्य के लिए नियमों को ताक पर रखकर मदद करती है।
शिक्षा व्यवस्था को चौपट कर इस सरकार ने स्किल इंडिया के तहत 40 करोड़ लोगों को कौशल योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया लेकिन 2024 तक स्नातकों में 17.31% बेरोज़गारी दर दर्ज हुई जो इस महत्वाकांक्षी योजना को भी फिसड्डी साबित करती है। नई शिक्षा नीति को 2020 में यह सरकार लांच करती है जो अब तक आधी अधूरी और असमंजस में घिरी नजर आती है। लगातार हो रही पेपर लीक की घटनाओं पर उन्होंने कहा कि 12 वर्षों के शासन काल में 89 प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक इस सरकार में हुए जिसमें अकेले मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में ही चार बार पेपर लीक हुए। सीबीएसई के स्कूली परीक्षा में गड़बड़ी की देश के इतिहास में पहली घटना भी इसी मोदी सरकार में सुनने और देखने को देशवासियों को मिली। बिहार में बीपीएससी, एईडीओ समेत कई परीक्षाओं के पेपर लीक हुए। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकानों के निर्माण में देरी हुई जबकि इसके लक्ष्य को 2022 में ही पूरा करने की बात कही गई लेकिन राज्यांश बेहद धीमे और कम राशि जारी किया गया। यह योजना अब भी पूरी तरीके से लागू फंड के कमी से नहीं हो पा रही है। मनरेगा के तहत ग्रामीण रोज़गार सुदृढ़ करने की कांग्रेस की UPA सरकार के योजना के बजट में इस सरकार ने 32% कटौती की घोषणा वर्ष 2023-24 में कर दी। ₹12,219 करोड़ रुपए मज़दूरी अब तक इस योजना का मोदी सरकार ने बकाया रखा है। जो इस सरकार को मजदूर विरोधी भी साबित करती है। सबका साथ, सबका विकास का जुमला देने वाली इस सरकार में CSSS के आंकड़े के अनुसार 2024 में 84% अधिक दंगे दर्ज हुए जिसमें अकेले मणिपुर में 258 मौतें हुई और 60 हजार लोगों को इन दंगों के कारण विस्थापित होना पड़ा।
भारत को विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश कांग्रेस ने बनाया लेकिन मोदी सरकार ने प्रेस स्वतंत्रता का गला घोंट दिया और आज 2026 में प्रेस स्वतंत्रता में हम 180 देशों की सूची में 157वें स्थान पर हैं। वहीं भूख एवं पोषण पर उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा मजबूत करने का दावा करने वाली यह सरकार GHI 2025 के आंकड़ों के अनुसार 123 देशों में 102 वें स्थान के निम्न स्तर पर है। बच्चों में स्टनिंग का प्रतिशत 35.5% पहुंच चुका है। महिला सम्मान को इस सरकार ने ताक पर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली यह सरकार WEF 2025 के आंकड़ों के अनुसार 148 देशों की सूची में 131वें स्थान पर है। देश के संसद में महिलाओं की भागीदारी मात्र 13.8% है। ईडी जैसी संस्थाओं के पारदर्शिता का दावा करने वाली यह सरकार 193 नेताओं पर ED का रेड करवाती है लेकिन दोषी उनमें से केवल 2 ही होते हैं जबकि 86 गुना ज्यादा छापे मारे जाते हैं। यह विपक्ष के नेताओं को डराने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। युवा बेरोजगारी, किसानों की समस्या, महंगाई, नोटबंदी से उपजी समस्याएं, स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली, व्यवसाय में छोटे व्यापारियों की बदतर स्थिति, शिक्षा व्यवस्था के साथ सौतेला व्यवहार, लगातार हो रही प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक, मनरेगा के बजट में कटौती, दंगे की घटनाओं में वृद्धि, प्रेस स्वतंत्रता में भारत की गिरती साख, भूख एवं पोषण में पिछड़ता देश, महिला सम्मान को ताक पर रखना और ईडी जैसी संस्थाओं के दुरूपयोग के लिए इस मोदी सरकार के 12 वर्षों के विनाश काल की पहचान है। संवाददाता सम्मेलन में बिहार मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़, प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन, पंकज यादव , प्रेमचंद सिंह एवं रवि कुमार मौजूद रहें।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें