शपथ लेने वाले अन्य मंत्री के. एच. मुनियप्पा, के जे जॉर्ज, एम बी पाटिल, रामलिंगा रेड्डी, सतीश जारकीहोली, कृष्णा बायरेगौड़ा, प्रियंक खरगे, यू टी खादर, ईश्वर खंड्रे, यतींद्र सिद्धरमैया, बिरथी सुरेश और शरण प्रकाश पाटिल हैं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘इस नए मंत्रिमंडल को देखने पर ऐसा लग सकता है कि इस पर सिद्धरमैया की छाप स्पष्ट है। हालांकि, इसका मतलब यह भी हो सकता है कि कैबिनेट गठन के अगले चरण में कई नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं।" विधानसभा के संख्याबल के आधार पर राज्य में मंत्रिपरिषद में अधिकतम 34 सदस्य हो सकते हैं। जातिगत समीकरण की बात करें तो शिवकुमार मंत्रिमंडल में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली वोक्कालिगा और वीरशैव-लिंगायत समुदायों से तीन-तीन मंत्रियों को जगह मिली है। दलित समुदाय से भी तीन मंत्री बनाए गए हैं। अन्य पिछड़े वर्ग के कुरुबा समुदाय से दो मंत्री हैं। अनुसूचित जनजाति, ईसाई और मुस्लिम समुदायों से क्रमश: एक-एक मंत्री बनाए गए हैं। जिलेवार प्रतिनिधित्व की बात करें तो सबसे अधिक चार मंत्री बेंगलुरु शहरी से हैं। इसके अलावा दो मंत्री कलबुर्गी और एक-एक मंत्री बेंगलुरु दक्षिण, बेंगलुरु ग्रामीण, तुमकुरु, विजयपुरा, बीदर, दक्षिण कन्नड़, बेलगावी और मैसूरु जिलों से हैं। यतींद्र सिद्धरमैया मंत्रिमंडल में जगह पाने वाले एकमात्र एमएलसी हैं। बाकी सभी मंत्री विधानसभा के सदस्य हैं।
बेंगलुरु । कर्नाटक में बुधवार को डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में शामिल किए गए 13 मंत्रियों में से 11 राज्य की पिछली सिद्धरमैया सरकार का हिस्सा थे। दिलचस्प बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के बेटे और एमएलसी यतींद्र को भी मंत्री बनाया गया है। हालांकि, मंत्रिमंडल गठन के पहले चरण में किसी भी महिला प्रतिनिधि को शामिल नहीं किया गया है। विधानसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले यू टी खादर और यतींद्र शिवकुमार मंत्रिमंडल में केवल दो नए चेहरे हैं। बाकी सभी मंत्री सिद्धरमैया नीत मंत्रिमंडल का हिस्सा रहे हैं। शपथ लेने वाले वरिष्ठ दलित नेता जी परमेश्वर को उप मुख्यमंत्री बनाया गया है।

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