आज यह तापमान वृद्धि मुख्य रूप से मानवीय गतिविधियों (जैसे जीवाश्म ईंधन जलाना और वनों की कटाई) के कारण हो रही है, जिससे पृथ्वी का संतुलन बिगड़ रहा है जिससे निपटना आवश्यक है श्री ललित कुमार सिंघानिया, प्रधान संपादक, पर्यावरण ऊर्जा टाइम्स– , संस्थापक और अध्यक्ष – एनवायरनमेंट एनर्जी फाउंडेशन , और सतत विकास सलाहकार ने " जलवायु परिवर्तन संकट को रोकने में हमारी सामूहिक भूमिका और मौजूदा संदर्भ में भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा की ज़रूरत" पर अपना व्याख्यान दिया और बताया की जलवायु परिवर्तन के सभी समाधानों का मूल आधार ग्रीनहाउस गैसों (जीएचजी) के उत्सर्जन को कम करना है, जिसे जल्द से जल्द शून्य तक पहुंचाना होगा आजकल विश्वभर में जलवायु परिवर्तन और जलवायु संकट पर चर्चा जोरों पर है. संकट से निपटने के लिए अनेक उपाय भी किए जा रहे हैं. इस चर्चा में अक्सर उत्सर्जन, उसे कम करने के उपायों के साथ-साथ पेड़ों का संरक्षण आवश्यक है अगले अथिति वक़्ता श्री कंवलजीत सिंह खुराना, फोटोवोल्टिक सोलर विशेषज्ञ ने "भारत की स्वच्छ ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए सोलर फोटोवोल्टिक ऊर्जा की क्षमता"विषय का अपना व्याख्यान दिया और बताया कि सोलर पीवी, या सोलर फोटोवोल्टाइक, सिलिकॉन जैसे अर्धचालकों से बनी एक तकनीक है, जो फोटोवोल्टाइक प्रभाव के माध्यम से सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है। प्रकाश के इस पदार्थ पर पड़ने से फोटोवोल्टेइक प्रभाव के कारण इलेक्ट्रॉन या अन्य मुक्त वाहक उत्पन्न होते हैं ऊर्जा का नवीकरणीय स्रोत हैं। फोटोवोल्टेइक सेल सूर्य के प्रकाश से बिजली उत्पन्न करने के लिए उपयोग किए जा सकते हैं, जो एक नवीकरणीय संसाधन है।
ये तेजी से सस्ते होते जा रहें हैं और आज गाँव में बिजली उत्पादन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है उसके बाद अथिति वक़्ता श्री दीपक गढ़िया, सोलर कंसंट्रेटेड थर्मल विशेषज्ञ ने भारत में विभिन्न प्रकार के माइक्रोन्यूट्रिएंट (सूक्ष्म पोषक तत्व) फर्टिलाइजर (खाद) उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत ब्रांड, पैकेट के आकार और प्रकार पर निर्भर करती है। आमतौर पर इनकी कीमत ₹150 से लेकर ₹800 प्रति किलोग्राम या लीटर के बीच होती है। "भारत की स्वच्छ ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए सोलर कंसंट्रेटेड थर्मल ऊर्जा की क्षमता" विषय पर अपना व्याख्यान दिया और बताया कि कनसंट्रेटेड सोलर थर्मल पावर: सूरज की रोशनी पर दांव. 2050 तक बिजली की कुल जरूरत का 25 फीसदी सोलर थर्मल पावर पूरा कर देगा.सोलर कंसंट्रेटर को एक ऐसे उपकरण के रूप में परिभाषित किया जाता है जो एक बड़ी सतह पर आपतित सौर ऊर्जा को एक छोटी सतह पर केंद्रित करता है, जिससे बायोमास को बायोफ्यूल में परिवर्तित करने जैसी विभिन्न प्रक्रियाओं सहित विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए सौर ऊर्जा को ग्रहण करना संभव हो जाता है। अगले अथिति वक़्ता श्री एस.आर सोनी, इथेनॉल विशेषज्ञ ने "सेल्युलोजिक (2G) इथेनॉल: सेल्युलोजिक बायोमास से 2G इथेनॉल के ज़रिए भारत में स्वच्छ ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने की संभावना" पर अपने व्याख्यान दिए उन्होंने बताया कि लिग्नोसेलुलोसिक बायोमास को बायोएथेनॉल में परिवर्तित करने की प्रक्रिया में चार प्रमुख चरण शामिल हैं: पूर्व-उपचार, सैक्रिफिकेशन, किण्वन और आसवन। सेलुलोज और हेमिकेलुलोज भागों को एंजाइमों या तनु अम्लों द्वारा सुक्रोज शर्करा में तोड़ा जाता है, जिसे बाद में किण्वित करके इथेनॉल में परिवर्तित किया जाता है जिससे आने वाले दिनों में पेट्रोल की जगह एक वैकल्पिक ईंधन का स्रोत हो सकता है . अगले वक्ता श्री विवेक काबरा (सोलर कुकर एक्सपर्ट) ने "भारत में स्वच्छ ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने में सोलर कुकर की क्षमता (खासकर घरेलू जीवन में)" अपना व्याख्यान दिया उन्होंने बताया कि सोलर कुकर एक ऐसा उपकरण है जो खाना पकाने या तरल पदार्थ गर्म करने के लिए सौर ऊर्जा या सूर्य की रोशनी का उपयोग करता है। यह लकड़ी, एलपीजी या बिजली जैसे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से पर्यावरण के अनुकूल, टिकाऊ और किफायती होने के कारण भिन्न है। यह उपकरण ग्रीनहाउस प्रभाव के सिद्धांत पर काम करता है।अतः आज एलपीजी सिलेंडर की जगह सोलर कुकर एक अच्छा विकल्प हो सकता है इसके बाद श्री संजय गोस्वामी, वैज्ञानिक,बीएआरसी व मुख्य व्यवस्थापक़ "वैज्ञानिक"साइंटिफिक जर्नल ने भारत में स्वच्छ ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने में परमाणु ऊर्जा की क्षमता पर अपना व्याख्यान दिया और बताया कि परमाणु ऊर्जा स्वच्छ, विश्वसनीय और किफायती बिजली उपलब्ध कराती है । यह वैश्विक बिजली का लगभग 9% और सभी कम कार्बन वाली बिजली का 25% हिस्सा है, और उत्पादन के समय ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं करती है।अतः परमाणु ऊर्जा बिजली उत्पादन में आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है इसके लिए भारत सरकार ने शान्ति बिल भी पास कराया है जिससे परमाणु ऊर्जा में इन्वेस्टमेंट हो और 2050 तक भारत में 20 गीगा wt का लक्ष्य पूर्ण हो सके अगले वक्ता श्री वीरल शाह (CEO, S3 फ्यूल्स; MSW से बायोडीजल और CNG बनाने के एक्सपर्ट) ने भारत में स्वच्छ ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने में बायोडीजल और बायो-CNG (म्युनिसिपल कचरे से बनी) की क्षमता।" पर अपना व्याख्यान दिया और बताया कि वर्तमान में राज्य में बायोडीजल का उत्पादन करने वाली 11 कम्पनियां है जो कि जयपुर,. सीकर, भीलवाड़ा, सिरोही, पाली एवं अन्य जिलों में स्थित है। इनकी प्रतिदिन बायोडीजल. उत्पादन क्षमता 4.20 लाख लीटर है बायोडिजल जैविक स्रोतों से प्राप्त तथा डीजल के समतुल्य इंधन है जो परम्परागत डीजल इंजनों को बिना परिवर्तित किये ही चला सकता है। उसके बाद डॉ. अमित खंडेवाल ,प्रोफेसर - माइक्रोबायोलॉजी, एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा ने 'भारत में स्वच्छ ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता के लिए केमिकल फर्टिलाइजर की जगह माइक्रोब-बेस्ड बायो-फर्टिलाइजर के इस्तेमाल की क्षमता।" पर अपने व्याख्यान प्रस्तुत किया और उन्होंने बताया कि भारत में विभिन्न प्रकार के माइक्रोन्यूट्रिएंट (सूक्ष्म पोषक तत्व) फर्टिलाइजर (खाद) उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत ब्रांड, पैकेट के आकार और प्रकार पर निर्भर करती है।
आमतौर पर इनकी कीमत ₹150 से लेकर ₹800 प्रति किलोग्राम या लीटर के बीच होती है।आज जब खाड़ी देश में युद्ध की वजह से फर्टिलाइजर का आना रुक गया है नाइट्रोजन की आपूर्ति, जिसमें यूरिया भी शामिल है, जो पौधों की वृद्धि में मदद करने और पैदावार बढ़ाने वाला सबसे व्यापक रूप से कारोबार किया जाने वाला उर्वरक है, शिपिंग में देरी और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एक आवश्यक घटक) की बढ़ती कीमतों के कारण सबसे बुरी तरह प्रभावित हुई है।अतः माइक्रोब-बेस्ड आने से भारत में फर्टिलाइजर की कमी को दूर किया जा सकता है. उसके बाद श्री संजीव जैन,पूर्व चीफ इंजीनियर, CREDA; रिन्यूएबल एनर्जी एक्सपर्ट ने "भारत में स्वच्छ ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने में रिन्यूएबल एनर्जी रिसोर्स की क्षमता और सरकारी नीतियों की भूमिका।" पर अपने व्याख्यान दिया और बताया की रिन्यूएबल सोर्स ऑफ एनर्जी भारत नवीकरणीय ऊर्जा (RE) की स्थापित क्षमता के मामले में विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर पहुँच गया है। वर्ष 2026 तक देश की कुल गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित क्षमता बढ़कर 283.46 GW के पार पहुँच गई है। भारत में कुल स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 274.68 GW से अधिक हो गई है। सौर ऊर्जा (Solar Power): ~154 GW क्षमता के साथ यह नवीकरणीय ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है। पवन ऊर्जा (Wind Power): 56 GW से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ देश इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर चौथे स्थान पर है। उत्पादन वृद्धि: वर्ष 2025-26 के दौरान रिकॉर्ड 39,657 मेगावाट नवीकरणीय क्षमता जोड़ी गई है। राज्यवार योगदान: भारत की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का 70% से अधिक हिस्सा राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख राज्यों में केंद्रित है। महत्वपूर्ण लक्ष्य और पहल:भारत सरकार का लक्ष्य 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करना है। इस लक्ष्य के साथ ही ऊर्जा क्षेत्र को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए नई राष्ट्रीय विद्युत नीति (NEP) 2026 का मसौदा भी पेश किया गया है रिन्यूएबल एनर्जी या अक्षय ऊर्जा, प्राकृतिक रूप से लगातार उत्पन्न होने वाले ऊर्जा स्रोत हैं जो कभी खत्म नहीं होते। ये ऊर्जा उत्पादन के दौरान पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाली हानिकारक गैसें (जैसे कार्बन) नहीं छोड़ते हैं और जलवायु परिवर्तन को कम करने में मदद करते हैं। इसके बाद अगले अतिथि वक्ता डॉ. सुरजीत डे मंडल, डीन, श्री दावदा यूनिवर्सिटी, रायपुर: यूनिवर्सिटी "एजुकेशन में क्लाइमेट चेंज और स्वच्छता; ऊर्जा शिक्षा की ज़रूरत।" ने बाताया कि जलवायु कार्रवाई के लिए शिक्षा का उपयोग तभी कारगर हो सकता है जब हम जलवायु परिवर्तन से शिक्षा की रक्षा भी करें। मौसम की चरम घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता शिक्षा को बाधित कर रही है, जिससे सीखने की क्षमता में भारी कमी आ रही है और स्कूल छोड़ने की दर बढ़ रही है।अतः शिक्षा पर जलवायु प्रभाव के प्रति जागरूकता होना चाहिए इसके बाद मुख्य अतिथि वक्ता श्री रमेश बैस जी : महाराष्ट्र, झारखंड और त्रिपुरा के पूर्व गवर्नर; 7 बार सांसद और पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री; मुख्य अतिथि वक्ता का संबोधन;था "भारत में नवीकरणीय ऊर्जा; ऊर्जा का महत्व" जिसपर उन्होंने बताया कि यह उन प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त ऊर्जा है जो अपनी खपत की तुलना में कहीं अधिक तेजी से पुन: उत्पन्न या नवीनीकृत होते हैं।
इनके उदाहरण हैं: सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा, जल विद्युत, महासागरीय ऊर्जा और जैव ऊर्जा आदि है भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में बड़ी तेजी देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2025-26 में सौर ऊर्जा (Solar Energy) क्षेत्र में रिकॉर्ड 45 GW की वृद्धि दर्ज की गई है, अतः यह भारत में ऊर्जा संकट को हल करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है जो प्रदूषण मुक़्त ऊर्जा है भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रक के प्रमुख लक्ष्य: राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) लक्ष्य वर्ष 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा संसाधनों से 50% संचयी विद्युत शक्ति स्थापित क्षमता प्राप्त करना। इस लक्ष्य को समयसीमा से पांच वर्ष पहले ही प्राप्त कर लिया गया है। पंचामृत लक्ष्य (2030 के लिए) भारत को अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का 50% हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरा करना है. 15. श्री एम.एल. नायक जी: पूर्व चेयरमैन - छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी; हेड ऑफ डिपार्टमेंट, बॉटनी, पं. रविशंकर यूनिवर्सिटी, रायपुर; ने इस वेबिनार का निष्कर्ष के बारे में बताया कि ऊर्जा हमेशा हमारे विकास में सहायक होता है भारत में ऊर्जा स्रोत के कई साधन हैं जिनसे हम बिजली, गर्मी और ईंधन प्राप्त करते हैं। इन्हें दो मुख्य श्रेणियों—नवीकरणीय (Renewable) और अनवीकरणीय (Non-renewable)—में विभाजित किया जाता है।अतः हमेशा हमें पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना भविष्य में ऊर्जा संकट का हल खोजना आवश्यक है अंत में एनवायरनमेंट एनर्जी फाउंडेशन श्री ललित कुमार सिंघानिया ने इस वेबिनार पर अपने विचार प्रस्तुत किए और बताया कि · ऊर्जा के ज्यादा इस्तेमाल से पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ता है| इस प्रतिकूल प्रभाव को कम करने हेतु हमें ऊर्जा का उपभोग कुशलतापूर्वक करना होगा व पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा संसाधनों का उपयोग करना चाहिए इसके बाद "प्रश्न-उत्तर सत्र, चला जिसमें प्रतिभागीयों ने कुछ प्रश्न पूछें और अपने को उनके उत्तर से संतुष्ट पाया सिंघानिया जी ने धन्यवाद प्रस्ताव और समापन पर सभी अथिति वक्ताऑ आयोजनकर्ता व प्रतिभागिओ को धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया इसके अलावा निबंध प्रतियोगिता का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया का विषय था - "स्वच्छ ऊर्जा से आत्मनिर्भर भारत की ओर टिकाऊ रास्ते में मेरी भूमिका"। देश भर से हिंदी और अंग्रेजी में लगभग 500 निबंध मिले और विजेताओ को पुरस्कार व सम्मान राशि दि गई अन्य प्रतिभागियो को प्रमाण पत्र व पर्यावरण ऊर्जा टाइम्स की एक वर्ष की निशुल्क सदस्यता दी गई.

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