डॉ. संजीव कुमार, अध्यक्ष, फसल उत्पादन प्रभाग एवं कार्यक्रम प्रभारी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि “मिट्टी की नियमित जांच एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड की अनुशंसाओं के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करने से न केवल उत्पादन लागत कम होती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहती है। स्वस्थ मिट्टी ही टिकाऊ कृषि और किसानों की समृद्धि की आधारशिला है।”डॉ. नारायण भक्त ने किसानों को संतुलित पोषण प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “अंधाधुंध उर्वरक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन अपनाकर किसान बेहतर उपज, उच्च पोषक तत्व उपयोग दक्षता तथा अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।”इस अवसर पर आईसीएआर-आरसीईआर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास ने अपना संदेश देते हुए कहा कि “विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्वस्थ मिट्टी और संसाधन-संरक्षण आधारित कृषि को बढ़ावा देना आवश्यक है। ‘खेत बचाओ अभियान’ किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने, मृदा स्वास्थ्य सुधारने तथा कृषि को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।”कार्यक्रम में किसानों को संतुलित उर्वरीकरण के दीर्घकालिक लाभों से भी अवगत कराया गया। बताया गया कि इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति, जल धारण क्षमता तथा मिट्टी की संरचना में सुधार होता है, जिससे टिकाऊ कृषि उत्पादन एवं किसानों की आय में वृद्धि संभव होती है।कार्यक्रम के अंत में किसानों ने मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग संबंधी जानकारी को अत्यंत उपयोगी बताया तथा स्वस्थ मिट्टी और बेहतर फसल उत्पादन के लिए संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने की इच्छा व्यक्त की।
पटना/पूर्वी चंपारण (संवाददाता), 4 जून । भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा “खेत बचाओ अभियान: स्वस्थ मिट्टी, सुरक्षित फसल, समृद्ध किसान” विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड अंतर्गत मनी छपरा गांव में किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन तथा टीम लीडर डॉ. संजीव कुमार के नेतृत्व में किया गया।कार्यक्रम में कुल 74 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 23 महिला किसान शामिल थीं। इस अवसर पर ग्राम मुखिया श्री गुड्डू सिंह तथा पैक्स अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार सिंह भी उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दौरान किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने से उर्वरकों का दक्ष उपयोग सुनिश्चित होता है, उत्पादन लागत कम होती है तथा फसलों की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में वृद्धि होती है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें