- पीएम सूर्य घर योजना ने आवासीय रूफटॉप सोलर की विकास दर को 45% सीएजीआर से बढ़ाकर लगभग दोगुना 85% CAGR कर दिया है
- रूफटॉप सोलर लगाने वाले 93% से अधिक लोग बिजली बिल की बचत से संतुष्ट; 87% लोग अन्य लोगों को अपने सोलर वेंडर से सोलर लगाने की सलाह देने के लिए तैयार हैं
- अध्ययन में पाया गया है कि भरोसेमंद मार्गदर्शन, सरल प्रक्रियाओं और फाइनेंसिंग की समझ जैसे कारकों से सौर ऊर्जा को विस्तार मिलेगा
प्रधानमंत्री सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना (PMSGY) की शुरुआत के बाद आवासीय रूफटॉप सोलर पर उपभोक्ताओं के नजरिए से किया गया CEEW का यह अध्ययन देश का पहला राष्ट्रीय सर्वेक्षण है। यह पूरे भारत के 22 राज्यों* के 308 जिलों के 17,000 से अधिक परिवारों के साथ बातचीत पर आधारित है। यह अध्ययन पता लगाता है कि परिवार रूफटॉप सोलर को अपनाने को कैसे समझते हैं, कैसे उसका मूल्यांकन करते हैं और कैसे आगे कदम बढ़ाते हैं। इस अध्ययन को नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की ओर से आयोजित कार्यक्रम 'टू ईयर्स ऑफ पीएम-सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना: स्केलिंग द सोलर होम दू वन करोड़ रूफटॉप्स' में जारी किया गया है। इसमें सामने आया है कि PMSGY शुरू होने के बाद से, आवासीय रूफटॉप सोलर की वृद्धि दर साल 2017-2023 में 45 प्रतिशत सीएजीआर (CAGR) से बढ़कर साल 2024-2026 के दौरान 85 प्रतिशत सीएजीआर (CAGR) हो गई है। रिपोर्ट को जारी करने के अवसर पर, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा (MNRE) मंत्री, श्री प्रल्हाद वेंकटेश जोशी, ने कहा, "रूफटॉप सोलर हर घर तक साफ-सुथरी बिजली पहुंचाने के भारत के सपने के केंद्र में है। 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' ने नागरिकों के लिए एक मजबूत मंच तैयार किया है, जिससे वे स्वयं अपनी साफ-सुथरी बिजली बना सकते हैं और अपना बिजली बिल घटा सकते हैं। इस अध्ययन ने बिल्कुल सही समय पर यह प्रमाण दिया है कि हम कैसे उपभोक्ताओं के सफर को और आसान बना सकते हैं, उनका भरोसा मजबूत कर सकते हैं, और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि अधिक से अधिक परिवारों को इस योजना का लाभ मिले।"
सौर ऊर्जा के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन परिवर्तन को सहायता देने की जरूरत
CEEW के अध्ययन में शामिल 57 प्रतिशत परिवारों को ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में घरों के लिए बिजली बनाने की रूफटॉप सोलर की क्षमता की जानकारी थी। हालांकि, यह अध्ययन बताता है कि भारत के सामने रूफटॉप सोलर के लिए अगली चुनौती सिर्फ जन-जागरूकता नहीं, बल्कि इसे अपनाने वाला बदलाव (कन्वर्जन) लाना है यानी इच्छुक परिवारों की उत्सुकता को आवेदन, फाइनेंसिंग , वेंडर के चुनाव और इंस्टॉलेशन (लगवाने की प्रक्रिया) तक आत्मविश्वास के साथ पहुंचाने में मदद करना है।
ऋषभ जैन, फेलो, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) , ने कहा, “भारत के रूफटॉप सोलर कार्यक्रम ने एक मजबूत लय पकड़ ली है। अगला चरण प्रक्रियागत से जुड़ी स्पष्ट सहायता, वित्तीय विकल्पों के बारे में बेहतर जानकारी और साक्ष्य-आधारित (एविडेंस-बेस्ड) संचार के माध्यम से रूफटॉप सोलर को लगाने के सफर को आसान बनाकर इसके बारे में जागरूकता को इसे लगाने के भरोसेमंद कदम में बदलना है। इसे अपनाने वालों के अनुभव बताते हैं कि इसके लाभ बिल्कुल ही स्पष्ट है; बस अब इसे और अधिक परिवारों के लिए सुलभ और आसान बनाने का काम करना है।” अध्ययन यह भी रेखांकित करता है कि एक बार जब कोई परिवार औपचारिक प्रक्रिया में शामिल हो जाता है, तो पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का प्रदर्शन काफी मजबूत रहता है, जिसमें लगभग दो-तिहाई आवेदक रूफटॉप सोलर लगाने की दिशा में आगे बढ़ते हैं। अभी रूफटॉप सोलर लगाने में पांच राज्य — गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और केरल — सबसे आगे हैं, जिनकी राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कुल क्षमता (नेशनल इंस्टॉल्ड कैपेसिटी) में 70 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी है। यह बताते हैं कि लक्षित पहुंच (टार्गेटेड आउटरीच), कार्यान्वयन सहायता और मजबूत स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से इसे अन्य राज्यों में भी मजबूती से आगे बढ़ाने का अवसर मौजूद है। फाइनेंसिंग (वित्तीय सहायता के विकल्पों) के बारे में जागरूकता रूफटॉप सोलर को अपनाने की राह में प्रमुख बाधाओं में से एक बनी हुई है। सर्वेक्षण में शामिल जिन परिवारों को रूफटॉप सोलर महंगा लगा, उनमें से लगभग चार में से तीन परिवार उपलब्ध फाइनेंसिंग विकल्पों के बारे में अनजान थे। इसके अलावा, सर्वेक्षण में शामिल, जागरूक होने के बावजूद रुचि न रखने वाले 26 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि यदि उन्हें आसान शर्तों पर ऋण, जैसे कि कम ब्याज दरें, लंबी अवधि और बिना गारंटी के ऋण (कोलेटरल-फ्री लोन) का प्रस्ताव मिले तो वे इसे अपनाने पर दोबारा विचार करेंगे। सीईईडब्ल्यू का अनुमान है कि विश्वसनीय संचार और पसंदीदा जनसंपर्क माध्यमों (आउटरीच चैनलों) के जरिए जागरूकता में सुधार 66 गीगावाट तक बदलने योग्य संभावित मांग (कन्वर्टिबल डिमांड) के रास्ते खोले जा सकता है।
रूफटॉप सोलर लगाने वाले एक भरोसेमंद स्थानीय चैंपियन बन सकते हैं
रूपटॉप सोलर अपनाने वाले लोगों के अनुभव इससे मिलने वाले लाभों की पुष्टि करते हैं। CEEW के सर्वेक्षण में सोलर लगाने वाले 93 प्रतिशत से अधिक लोग बिजली बिल की बचत से संतुष्ट थे, जबकि 87 प्रतिशत लोग अपने सोलर वेंडर (विक्रेता) से सोलर लगाने कीसिफारिश दूसरों से करने के लिए तैयार थे। यह दर्शाता है कि संतुष्ट उपभोक्ता स्थानीय स्तर पर रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए सबसे विश्वसनीय माध्यमों में से एक बन सकते हैं।
सुझाव
इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए, सीईईडब्ल्यू चरणबद्ध और लक्षित (स्टेज-वाइज और टार्गेटेड) प्रयासों को अपनाने का सुझाव देता है। इसमें स्थानीय संस्थानों के माध्यम से भरोसेमंद संपर्क बनाना; PMSGY के तहत आवेदन करने के बारे में आसान भाषा में संचार; वेंडर के चयन और मंजूरी (अप्रूवल) के लिए मजबूत सहायता; बिना गारंटी के ऋण (कोलेटरल-फ्री लोन), ईएमआई, भुगतान अवधि (पेबैक पीरियड) और अपेक्षित शुद्ध बचत के बारे में वित्तीय समझ बढ़ाना; और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), ग्राम सभाओं, सामुदायिक बैठकों और सोलर ओपन-हाउस सत्रों के जरिए सोलर अपनाने वाले लोगों के नेतृत्व में परिचर्चा का आयोजन करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं, ताकि आने वाले नए उपभोक्ता दूसरों के अनुभवों से सोलर लगवाने की यात्रा को आसानी से समझ सकें।


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