पटना : स्वस्थ मिट्टी, सुरक्षित फसल, समृद्ध किसान विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

बुधवार, 17 जून 2026

पटना : स्वस्थ मिट्टी, सुरक्षित फसल, समृद्ध किसान विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

Farmer-awareness-bihar
पटना (रजनीश के झा), 17 जून । भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा पूर्वी चंपारण जिले के चकिया प्रखंड अंतर्गत घनश्याम पकड़ी गांव में “खेत बचाओ अभियान: स्वस्थ मिट्टी, सुरक्षित फसल, समृद्ध किसान” विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कुल 47 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 32 पुरुष एवं 15 महिला किसान शामिल थीं। कार्यक्रम के दौरान किसानों को मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग, हरी खाद के महत्व तथा समेकित कृषि प्रणाली मॉडल को अपनाने के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन एवं हरी खाद का उपयोग मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने तथा फसल उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


इसके अलावा किसानों को ढैंचा आधारित हरी खाद प्रदर्शन प्लॉट का भ्रमण भी कराया गया, जहां उन्हें हरी खाद की खेती एवं उसके लाभों के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. अभिषेक कुमार एवं डॉ. रचना दुबे द्वारा किया गया। यह कार्यक्रम संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन तथा डॉ. संजीव कुमार के नेतृत्व में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा वैज्ञानिकों द्वारा दी गई उपयोगी जानकारी की सराहना की। किसानों ने समेकित कृषि प्रणाली मॉडल, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन एवं हरी खाद तकनीक को अपनाने में गहरी रुचि व्यक्त की। साथ ही, उन्होंने मिट्टी के स्वास्थ्य में आ रही गिरावट को लेकर चिंता जताई और इसके संरक्षण हेतु वैज्ञानिक उपायों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों के बीच मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रसार तथा कृषि उत्पादन में दीर्घकालिक वृद्धि के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

कोई टिप्पणी नहीं: