वैज्ञानिकों ने समेकित पोषक तत्व प्रबंधन को टिकाऊ कृषि का आधार बताते हुए जैविक खाद, जैव उर्वरकों एवं हरित खाद के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। किसानों को फसल अवशेषों के पुनर्चक्रण, वर्मीकम्पोस्ट के प्रयोग तथा फसल चक्र में दलहनी फसलों के समावेशन के माध्यम से मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता सुधारने के उपायों की जानकारी दी गई।अधिकतम पोषक तत्व उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु ढैंचा को खेत में मिलाने के उपयुक्त समय एवं उसकी वैज्ञानिक पद्धति पर भी चर्चा की गई। संवाद सत्र के दौरान किसानों ने अपने क्षेत्र में फसल विविधीकरण की संभावनाओं पर वैज्ञानिकों से विचार-विमर्श किया तथा विभिन्न वैकल्पिक कृषि प्रणालियों की जानकारी प्राप्त की। किसानों ने मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन एवं संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति विशेष रुचि दिखाई।
पटना । भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा "खेत बचाओ अभियान" के अंतर्गत 19 जून, 2026 को पटना जिले के दुल्हिन बाजार प्रखंड के सिलहौरी गांव में संतुलित एवं विवेकपूर्ण उर्वरक उपयोग विषय पर किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। भूमि एवं जल प्रबंधन के प्रभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष उपाध्याय के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन डॉ. सोनाका घोष एवं डॉ. एम.के. त्रिपाठी द्वारा किया गया, जिसमें 31 किसानों (19 महिलाएं एवं 12 पुरुष) की सहभागिता रही। कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन की आवश्यकता पर बल देते हुए किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के लाभों से अवगत कराया। उन्होंने नाइट्रोजन उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से उत्पन्न होने वाली समस्याओं, जैसे फसलों का गिरना (लॉजिंग), कीट एवं रोगों की बढ़ती संभावना तथा पोषक तत्व उपयोग दक्षता में कमी, के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

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