- 'विंड प्रोक्योरमेंट चैंपियन' सम्मान से नवाजा गया उत्तर प्रदेश, 5805 मेगावाट पवन ऊर्जा का दीर्घकालिक प्रबंध, 2030 तक 5000 मेगावाट और खरीदने की तैयारी
श्री शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पवन ऊर्जा उत्पादन की प्राकृतिक संभावनाएं सीमित हैं, लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार ने दूरदर्शिता दिखाते हुए गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु और अन्य पवन ऊर्जा उत्पादक राज्यों से दीर्घकालिक अनुबंधों के माध्यम से हरित ऊर्जा खरीदने का अभिनव मॉडल अपनाया है। यही मॉडल आज पूरे देश में उत्तर प्रदेश की पहचान बना रहा है। उन्होंने बताया कि भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI) और पावर ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन (PTC) के माध्यम से प्रदेश ने अब तक लगभग 5805 मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता का दीर्घकालिक प्रबंध कर लिया है। इनमें से लगभग 1630 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं और प्रदेश को नियमित रूप से हरित बिजली उपलब्ध करा रही हैं। इसके अतिरिक्त वर्ष 2030 तक निर्धारित रिन्यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन (RPO) के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए यूपीपीसीएल ने 5000 मेगावाट अतिरिक्त पवन ऊर्जा खरीदने की कार्ययोजना पर भी तेजी से काम शुरू कर दिया है।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि पवन ऊर्जा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह गर्मियों के मौसम में तथा शाम और रात के समय भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहती है। यही वह समय होता है जब बिजली की मांग सबसे अधिक रहती है। ऐसे में पवन ऊर्जा प्रदेश की बढ़ती बिजली आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे महंगी पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा आपूर्ति भी अधिक संतुलित एवं विश्वसनीय बनेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल उपभोक्ता राज्य द्वारा बड़े पैमाने पर हरित ऊर्जा खरीदने से न केवल कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से मुकाबला और सतत विकास के राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी मजबूती मिलेगी। यह उपलब्धि निवेशकों के लिए भी सकारात्मक संकेत है, जिससे भविष्य में प्रदेश में हरित ऊर्जा क्षेत्र में नए निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। ऊर्जा विभाग के अनुसार यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की राष्ट्रीय स्तर पर हुई औपचारिक मान्यता है। आने वाले वर्षों में प्रदेश सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के समन्वित उपयोग से देश की ऊर्जा क्रांति का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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