दिल्ली : कोयला खदान ‘घोटाला’ : अदालत ने हिंडाल्को को आरोप मुक्त किया - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 3 जून 2026

दिल्ली : कोयला खदान ‘घोटाला’ : अदालत ने हिंडाल्को को आरोप मुक्त किया

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नई दिल्ली । एक अदालत ने ओडिशा के तलबीरा-1 कोयला खदान के उपयोग में कथित अनियमितताओं से संबंधित एक मामले में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसके दो पूर्व अधिकारियों को आरोप मुक्त कर दिया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के मामलों की सुनवाई के लिए नियुक्त विशेष न्यायाधीश धीरज मोर ने कहा कि केंद्रीय एजेंसी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड, एस. के. तमोतिया और पी. आर. एस. मणि के ‘‘कोई भी अवैध कृत्य’’ करने के आरोप को साबित करने में विफल रही है।  न्यायाधीश ने 30 मई को पारित आदेश में कहा, ‘‘...न तो कोई साक्ष्य मौजूद है और न ही कोई ऐसा तर्कसंगत कारण है जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि उन्होंने किसी तरह के अवैध कृत्य को अंजाम देने के लिए आपराधिक षड्यंत्र रचा था, जिसमें आपराधिक विश्वासघात या धोखाधड़ी का अपराध भी शामिल है। इसलिए, वे उक्त अपराध से आरोप मुक्त किये जाने के हकदार हैं।’’ यह मामला 2015 में दर्ज की गई एक प्राथमिकी से संबंधित है, जिसमें 1994 में हिंडाल्को को तलबीरा-1 कोयला खदान के आवंटन के संबंध में आरोप लगाया गया था। सीबीआई ने आरोप लगाया था कि कंपनी ने हीराकुड स्थित अपने बिजली संयंत्र के लिए खदान से निकाले गए कोयले का उपयोग करके आपराधिक विश्वासघात किया, जबकि प्रारंभिक आवंटन पत्र में यह स्पष्ट रूप से कहा गया था कि कोयला केवल प्रस्तावित विस्तारित इकाई के लिए था। हालांकि, अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए रेखांकित किया कि विस्तारित इकाई के लिए कोयले के विशेष उपयोग से संबंधित ‘‘विवादित शर्त’’ 2003 में निष्पादित औपचारिक खनन-पट्टे के विलेख में स्पष्ट रूप से अनुपस्थित थी। अदालत ने सीबीआई की इस दलील को ‘‘पूरी तरह से गलत’’ बताते हुए खारिज कर दिया कि 25 फरवरी 1994 का आवंटन पत्र, खनन कार्यों को करने के लिए तलबीरा-1 कोयला खदान को सौंपने का अनुबंध था।अदालत ने कहा कि यह पत्र केवल वैधानिक औपचारिकताओं की पूर्ति और सरकार के निरंतर विवेकाधिकार के अधीन सरकारी इरादे की अभिव्यक्ति मात्र था, न कि हिंडाल्को को कोई निहित अधिकार प्रदान करने वाला।

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