किशोर कुमार मुन्ना ने कहा कि इस मामले में पुलिस प्रशासन निष्पक्ष तरीके से कार्य करने में विफल रहा है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच होती, तो शायद भरत भूषण तिवारी आज जीवित होते। उन्होंने मांग की कि मामले की न्यायिक जांच कराई जाए तथा एसपी और डीएसपी को निलंबित कर उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। केवल थानाध्यक्ष को निलंबित कर देने से न्याय नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य में नई सरकार बनने और नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पदभार संभालने के बाद से फर्जी एनकाउंटर की घटनाएं बढ़ी हैं। जाति और धर्म के नाम पर जो लोग मुखर होकर समाज की समस्याओं को प्रशासन के सामने रखते हैं, उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि राज्य में हुए सभी एनकाउंटर मामलों की न्यायिक जांच कराई जाए। कैंडल मार्च में पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना, तथागत हर्षवर्धन, सरवर अली, आरके मिश्रा, रविन्द्र द्विवेदी, पदमा ओझा, अनूप मैथिल, विवेक कुमार, इंदु सिन्हा,सोनाली आनंद, आदित्य मोहन, इम्तियाज वारसी, सुभाष कुशवाहा, कुमार सौरभ, शोएब खान, राज कपूर, राकेश पटेल समेत बड़ी संख्या में जन सुराज पार्टी के कार्यकर्ता एवं स्थानीय लोग शामिल हुए।
पटना (रजनीश के झा), 21 जून। भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड के बेलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस एनकाउंटर में हुई मौत के विरोध में जन सुराज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कारगिल चौक पर रविवार को प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती के नेतृत्व में कैंडल मार्च निकालकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया इस दौरान गद्दारों को फांसी दो, फर्जी गोली नहीं चलेगी, सरेंडर के बाद हत्या, लोकतंत्र पर आघात, गोली का नहीं संविधान का राज चलेगा जैसे बैनर देखने को मिले। वहीं मौजूद लोगों ने भरत को न्याय दिलाने के लिए नारेबाजी भी की। प्रदेश जिला अध्यक्ष मनोज भारती ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इस मार्च का उद्देश्य पीड़ित को न्याय दिलाने की मांग को मजबूत करना तथा समाज में शांति और एकजुटता का संदेश देना है। जिस तरह एक सामाजिक कार्यकर्ता की कथित एनकाउंटर में मौत हुई है, वह बेहद दुखद और निंदनीय है। भरत तिवारी वर्षों से जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाते रहे थे। जो व्यक्ति जनहित के लिए संघर्ष कर रहा हो, उसकी इस तरह मौत होना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए शीघ्र न्यायिक जांच कराई जाए। जांच पूरी होने तक कार्रवाई में शामिल सभी अधिकारियों को निलंबित किया जाए। साथ ही पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और 1 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए।

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