बक्सर जिला परिषद की अध्यक्ष श्रीमती सरोज देवी ने जमीनी स्तर पर प्राकृतिक खेती एवं संसाधन संरक्षण आधारित प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और किसान समुदायों को मृदा स्वास्थ्य में सुधार, खेती की लागत में कमी तथा ग्रामीण परिवारों के लिए सतत आजीविका अवसरों के सृजन हेतु मिलकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने किसानों के बीच सफल कृषि नवाचारों के व्यापक प्रसार को भी प्रोत्साहित किया। संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने कहा कि कृषि को अधिक संसाधन-आधारित प्रणाली से आगे बढ़ाकर ज्ञान एवं संसाधन-कुशल प्रणाली बनाना होगा। प्राकृतिक खेती, संतुलित पोषण प्रबंधन, जल संरक्षण और जलवायु-अनुकूल तकनीकें भविष्य की टिकाऊ कृषि की आधारशिला हैं। हमारा संस्थान किसानों को ऐसी वैज्ञानिक तकनीकें उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, जो उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी, जल और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित करें | उन्होंने जनप्रतिनिधियों के सहयोग से उन्नत कृषि तकनीकों के व्यापक प्रसार का भी आश्वासन दिया। जिला परिषद सदस्यों ने प्रौद्योगिकी प्रदर्शन, क्षमता निर्माण, प्राकृतिक खेती के प्रसार, पोषण वाटिका विकास, जल संरक्षण तथा टिकाऊ आजीविका संवर्धन के लिए चयनित गांवों में संस्थान के साथ मिलकर कार्य करने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गांव स्तर पर समन्वित प्रयासों से कृषि उत्पादकता, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है। प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग के प्रमुख डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने कृषि भूमि संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य पुनर्स्थापन तथा उभरती कृषि चुनौतियों से निपटने के लिए सतत् कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के महत्व पर प्रकाश डाला।
किसानों के लाभ हेतु प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों एवं व्यवहारिक पहलुओं पर डॉ. शिवानी द्वारा एक प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में सतत मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के विभिन्न घटकों, बहु-तनाव सहनशील फसल किस्मों, धान की सीधी बुआई तथा कुशल जल प्रबंधन तकनीकों पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई। सूखे के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के उद्देश्य से किसानों को सूखा-सहिष्णु धान की किस्म ‘स्वर्ण श्रेया’ के बीजों के साथ-साथ सब्जी बीज एवं पौध सामग्री उपलब्ध कराई गई। इस अवसर पर प्रतिभागियों के लाभार्थ प्राकृतिक खेती पर एक किसान मार्गदर्शिका का भी विमोचन किया गया। प्रतिभागियों ने संस्थान की प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी एवं अनुसंधान प्रक्षेत्रों का भ्रमण किया, जहाँ उन्हें प्राकृतिक खेती, फल आधारित पोषण वाटिका, समेकित कृषि प्रणाली (आईएफएस) मॉडल तथा महिला-केंद्रित नवाचारी गृहस्थी मॉडलों सहित अनेक किसानोन्मुखी नवाचारों से अवगत कराया गया। जनप्रतिनिधियों ने संसाधनों के कुशल उपयोग एवं किसानों की आजीविका सुधार हेतु उपयोगी मॉडलों एवं प्रौद्योगिकियों के विकास में संस्थान के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने संस्थान के सहयोग से अपने-अपने जिलों में ऐसे प्रकृति-अनुकूल दृष्टिकोणों के प्रसार की इच्छा व्यक्त की।कार्यक्रम में 13 जिला परिषद सदस्यों, जिला परिषद अध्यक्षों तथा किसानों सहित 75 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया और संस्थान द्वारा प्रोत्साहित सतत कृषि प्रौद्योगिकियों को अपनाने में गहरी रुचि व्यक्त की। कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समन्वयन डॉ. अभय कुमार, डॉ. शिवानी, डॉ. देवकरण, डॉ. पी. के. सुंदरम, डॉ. धीरज कुमार सिंह, डॉ. कुमारी शुभा एवं डॉ. आरती कुमारी द्वारा किया गया। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. आरती कुमारी द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. धीरज कुमार सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया।

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