सीहोर : मात्र 50 मीटर की सड़क नहीं बना पा रहा प्रशासन, क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार है? - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 5 जून 2026

सीहोर : मात्र 50 मीटर की सड़क नहीं बना पा रहा प्रशासन, क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार है?

Sehore-roads
सीहोर, 05 जून, । मनकामेश्वर मंदिर से बाल विहार ग्राउंड तक का लगभग मात्र 50 मीटर लंबा मार्ग इन दिनों प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक बन चुका है। नगर पालिका, पीएचई एवं संबंधित विभागों द्वारा पाइपलाइन कार्य के नाम पर इस सड़क को कई बार खोदा गया, लेकिन हर बार मरम्मत अधूरी छोड़ दी गई। स्थिति यह है कि सड़क पर गड्ढे, कीचड़, उड़ती धूल और बीच रास्ते पड़े मिट्टी के ढेर लोगों के लिए रोजाना परेशानी का कारण बन रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस सड़क की बात की जा रही है, वह कलेक्टर निवास की बिल्कुल बगल में तथा जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के ठीक सामने स्थित है। इसके बावजूद महीनों से सड़क की यह बदहाल स्थिति बनी हुई है। बीच सड़क पर खोदे गए गढ्ढे में आए दिन कभी ट्राली तो कभी ट्रक यह अन्य वाहन फंस जाते हैं। इसी गड्ढे में एक किसान की ट्रॉली फंस गई जिससे ट्रैफिक जाम लग गया और नागरिक परेशान होते रहे। लोगों को धूल, कीचड़ और अव्यवस्थित यातायात के बीच भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इसी सड़क पर कोई एंबुलेंस फंस जाए, किसी गंभीर मरीज को अस्पताल पहुंचने में देरी हो जाए या कोई बड़ा हादसा हो जाए, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या प्रशासन और संबंधित विभाग किसी दुर्घटना के बाद ही जागेंगे? देश में ऐसे मामलों के दुखद उदाहरण पहले भी सामने आ चुके हैं। हाल के महीनों में निर्माण कार्यों के लिए खोदे गए और असुरक्षित छोड़े गए गड्ढों के कारण लोगों की जान तक जा चुकी है। नोएडा में एक युवा इंजीनियर की मौत और दिल्ली में निर्माण कार्य के लिए खोदे गए गड्ढे में गिरने से एक युवक की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इसके बावजूद यदि संबंधित विभाग सबक लेने को तैयार नहीं हैं, तो यह और भी चिंताजनक है। जब मात्र 50 मीटर की सड़क को भी समय पर दुरुस्त नहीं किया जा सकता, तो विकास और जनसुविधाओं के बड़े-बड़े दावों का क्या अर्थ रह जाता है?

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