बैठक के बाद सावंत ने संवाददाताओं से कहा कि इन छह सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे। लोकसभा में शिवसेना (उबाठा) के नेता सावंत ने कहा, ‘‘उनसे पूछा जाएगा कि व्हिप जारी किए जाने के बावजूद वे बैठक में शामिल क्यों नहीं हुए। उन्हें जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया जाएगा। यदि वे जवाब नहीं देते हैं तो हम उनकी सदस्यता रद्द किए जाने की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखेंगे।’’ राउत ने कहा कि सांसदों के बैठक में शामिल नहीं होने को पार्टी के व्हिप का उल्लंघन माना जाएगा और उन्हें सांसद के तौर पर अयोग्य ठहराने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि सभी छह बागी सांसदों ने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय की मांग करते हुए एक पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं और उसे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंप दिया है। उन्होंने कहा कि हालांकि, यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है क्योंकि माना जा रहा है कि अध्यक्ष कार्यालय को सत्यापन के लिए कुछ सांसदों की व्यक्तिगत उपस्थिति की जरूरत है और यह प्रक्रिया ‘‘आगामी दिनों में’’ पूरी होने की संभावना है।
सूत्रों ने बताया कि फिलहाल हस्ताक्षरों का सत्यापन किया जा रहा है। सावंत ने कहा कि यदि ऐसा कोई पत्र है तो बागी सांसदों को उसे सार्वजनिक करना चाहिए। राउत ने कहा, ‘‘इस बार उनके (बागी नेताओं के) लिए राह आसान नहीं है और उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।’’ राउत ने चेतावनी देते हुए कहा, ‘‘गद्दार न तो अपने घर जा पाएंगे और न ही अपने निर्वाचन क्षेत्रों में। उन्हें उचित सबक सिखाया जाएगा। घर पहुंचने के लिए उन्हें सेना की मदद लेनी पड़ेगी।’’ उन्होंने देश के मौजूदा राजनीतिक हालात के लिए उच्चतम न्यायालय और निर्वाचन आयोग को भी जिम्मेदार ठहराया। शिवसेना (उबाठा) ने बुधवार को तीन लाइन का व्हिप जारी कर अपने सांसदों को बृहस्पतिवार पूर्वाह्न 11 बजे बैठक में शामिल होने का निर्देश दिया था। इस कदम का उद्देश्य बागी नेताओं के खिलाफ अयोग्यता की संभावित कार्यवाही का रास्ता तैयार करना था। लोकसभा में शिवसेना (उबाठा) के नौ सदस्य हैं और दल-बदल रोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम छह सांसदों को एक साथ पाला बदलना होगा। सावंत ने बैठक से पहले संवाददाताओं से कहा था, ‘‘व्हिप का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पार्टी प्रमुख (उद्धव ठाकरे) से विचार-विमर्श के बाद कार्रवाई की जाएगी।’’
हालांकि, शिंदे गुट के सूत्रों ने व्हिप की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल रोधी कानून) के तहत व्हिप केवल सदन की कार्यवाही के लिए जारी किया जा सकता है, पार्टी की आंतरिक बैठकों के लिए नहीं। शिंदे गुट के एक पदाधिकारी ने कहा, ‘‘अदालतें कई बार कह चुकी हैं कि कोई राजनीतिक दल संगठनात्मक अनुशासन के तहत (बैठकों में शामिल होने समेत) आंतरिक निर्देश जारी कर सकता है लेकिन ऐसे व्हिप का पालन नहीं करने पर दसवीं अनुसूची के तहत तब तक कार्रवाई नहीं हो सकती, जब तक कि मामला सदन में मतदान से जुड़ा न हो।’’ सूत्रों के अनुसार, शिंदे मंगलवार देर रात दिल्ली पहुंचे और बुधवार को मुंबई लौट गए। अविभाजित शिवसेना में 2022 में हुए विभाजन के मुख्य सूत्रधार शिंदे ही थे। उस विभाजन के कारण महा विकास आघाडी सरकार गिर गई थी। सावंत, देसाई और राउत ने बुधवार को बिरला से मुलाकात कर उनसे किसी भी गैरकानूनी दल-बदल को रोकने का आग्रह किया था। देसाई ने कहा था, ‘‘कानून के तहत दो-तिहाई सांसदों का समर्थन होने पर भी कोई समूह सीधे किसी अन्य दल में विलय नहीं कर सकता। किसी समूह के पास जरूरी दो-तिहाई बहुमत होने पर केवल मूल राजनीतिक दल का विलय हो सकता है।’’

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