- सनातन सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष सन्नी सरदार ने कहा हमें गर्व है कि हम सनातनी है

सीहोर। हर साल की तरह इस साल भी आर्यावर्त षट्दर्शन साधु मंडल भारत सनातन सेना के तत्वाधान में 15 दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ एक प्रयास संस्था, श्रद्धा भक्ति सेवा समिति और सनातन सेना के संयुक्त तत्वाधान में शहर के सैकड़ाखेड़ी स्थित संकल्प नशा मुक्ति केन्द्र में किया जा रहा है। गुरुवार को झांसी की रानी लक्ष्मीबाई एवं सिख धर्म के पांचवें गुरु गुरु अर्जुन देव जी की पुण्यतिथि श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई, आगामी दिनों में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, धूमावती जयंती, महेश नवमी, गायत्री जयंती, भीमसेनी ग्यारस, संत कबीर जयंती के अलावा गुरु हरगोविंद जयंती के साथ एक जुलाई को डाक्टर्स एवं सीए दिवस के साथ समापन किया जाएगा। कार्यक्रम में केन्द्र के संचालक राहुल सिंह, संस्कार मंच के प्रभारी मनोज दीक्षित मामा, आयुष गुप्ता, कमलेश राय आदि ने सनातन सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संत माधव दास, प्रदेश उपाध्यक्ष सन्नी सरदार, प्रदेश सचिव पवन केवट आदि का स्वागत सम्मान किया। इस मौके पर सनातन सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष सन्नी सरदार ने कहाकि हमें गर्व है कि हम सनातनी है। रानी लक्ष्मी बाई, गुरु अर्जुन देव और अनगिनत अन्य महान आत्माओं के सर्वोच्च बलिदान और त्याग की नींव पर ही हमारे देश की सुरक्षा और स्वतंत्रता टिकी हुई है। उन्होंने कहाकि रानी लक्ष्मी बाई 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ अदम्य साहस का परिचय दिया और खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी के संकल्प के साथ देश के लिए लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं। गुरु अर्जुन देव सिखों के पांचवें गुरु, मुगल शासक जहांगीर के अत्याचारों के आगे झुकने से इनकार कर दिया और धर्म व मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
चित्रों पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजली दी गई
गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई एवं सिख धर्म के पांचवें गुरु अर्जुन देव की पुण्यतिथि श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उनके चित्रों पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजली दी गई। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई भारतीय इतिहास की वीरांगना थीं, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनका साहस, शौर्य और देशभक्ति आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वक्ताओं ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई ने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और मातृभूमि की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष किया।
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