- शिक्षा, संस्कार, समरसता और स्वावलंबन का संदेश; डॉ. इन्द्रेश कुमार ने युवाओं को बनाया राष्ट्र निर्माण का अग्रदूत, मेधावी विद्यार्थियों का हुआ सम्मान
पंच परिवर्तन: राष्ट्र जागरण का जनआंदोलन
सम्मेलन के मुख्य वक्ताओं ने कहा कि पंच परिवर्तन केवल एक अभियान नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला जनआंदोलन है। इसके पाँच प्रमुख आयाम—सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी के माध्यम से आत्मनिर्भरता, नागरिक कर्तव्य तथा पारिवारिक जागरूकता एवं संस्कार—भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की मजबूत आधारशिला हैं।
डॉ. इन्द्रेश कुमार ने युवाओं को बताया भारत की सबसे बड़ी शक्ति
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक एवं वरिष्ठ आरएसएस प्रचारक डॉ. इन्द्रेश कुमार ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल सरकारों के प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक और विशेष रूप से युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा, "विकसित भारत 2047 का लक्ष्य तभी प्राप्त होगा जब देश का प्रत्येक नागरिक स्वयं को राष्ट्र निर्माण का सहभागी माने। पंच परिवर्तन युवाओं को सामाजिक समरसता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पर्यावरणीय जिम्मेदारी, आत्मनिर्भरता और सक्रिय नागरिकता का व्यावहारिक मार्ग प्रदान करता है।" उन्होंने युवाओं से स्वच्छता, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए कहा "हम स्वयं स्वच्छ रहेंगे, गंदगी नहीं करेंगे और न ही अपने आसपास गंदगी होने देंगे। स्वच्छता ही विकसित भारत का प्रथम संस्कार है।" डॉ. इन्द्रेश कुमार ने सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के जिम्मेदार उपयोग पर भी बल दिया और युवाओं से आग्रह किया कि वे तकनीक का उपयोग सत्य, सद्भाव और राष्ट्र निर्माण के लिए करें।
"युवाओं का चरित्र और दायित्व तय करेगा भारत का भविष्य: प्रो. शाहिद अख्तर
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग के कार्यकारी अध्यक्ष एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक प्रो. शाहिद अख्तर ने कहा कि भारत का भविष्य केवल आर्थिक विकास या तकनीकी प्रगति से नहीं, बल्कि युवाओं के चरित्र, दृष्टि और जिम्मेदारी से तय होगा। उन्होंने कहा, "धर्म, भाषा, जाति और क्षेत्र हमारी सामाजिक पहचान का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन हमारी सबसे बड़ी पहचान भारतीय होना है। जब युवा स्वयं को राष्ट्र की प्रगति का भागीदार मानते हैं, तब वे स्वाभाविक रूप से जिम्मेदार, रचनात्मक और सकारात्मक बन जाते हैं।" उन्होंने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र सेवा की भावना विकसित करना है।
शिक्षा का लक्ष्य केवल ज्ञान नहीं, चरित्र निर्माण भी: प्रो. नरेंद्र सिंह
जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज के प्राचार्य प्रो. नरेंद्र सिंह ने कहा कि शिक्षण संस्थानों का दायित्व केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिकता, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करना भी है। उन्होंने कहा, "जब विद्यार्थी सम्मान, सहानुभूति और सेवा के मूल्यों को अपनाते हैं, तब वे राष्ट्र निर्माण के सच्चे सहभागी बनते हैं।"
मानवता और राष्ट्रीय जिम्मेदारी ही विकसित भारत की नींव: मोहम्मद अफजल
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजल ने कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में नहीं, बल्कि उस विविधता को जोड़ने वाली मानवता में निहित है। उन्होंने कहा, "हमें सबसे पहले स्वयं को इंसान और भारत का नागरिक मानना चाहिए। घृणा, हिंसा और विभाजन से दूर रहकर स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव को अपनाना ही पंच परिवर्तन का वास्तविक स्वरूप है।"
परिवार, संवाद और सामाजिक सद्भाव से बनेगा विकसित भारत: गिरीश जुयाल
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संगठन संयोजक गिरीश जुयाल ने कहा कि विकसित भारत की नींव केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि मजबूत पारिवारिक मूल्यों, सामाजिक सद्भाव और मानवीय रिश्तों पर आधारित है। उन्होंने कहा, "वसुधैव कुटुम्बकम की भावना हमें बताती है कि पूरा विश्व एक परिवार है। समाज को जोड़ने वाला हर छोटा प्रयास राष्ट्र निर्माण की दिशा में बड़ा योगदान है।"
युवा ही विकसित भारत के वास्तविक निर्माता: डॉ. मोहम्मद शम्स इकबाल
राष्ट्रीय उर्दू भाषा प्रोत्साहन परिषद (NCPUL) के निदेशक डॉ. मोहम्मद शम्स इकबाल ने कहा कि विकसित भारत की यात्रा में युवाओं की भूमिका निर्णायक है। उन्होंने कहा, "शिक्षा केवल ज्ञान नहीं देती, बल्कि मूल्य, चरित्र और सामाजिक उत्तरदायित्व भी विकसित करती है। पंच परिवर्तन का संदेश युवाओं को सेवा, समरसता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करता है।"
पंच परिवर्तन को जनआंदोलन बनाने का आह्वान: डॉ. इमरान चौधरी
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के छात्र एवं मदरसा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. इमरान चौधरी ने कहा कि आज की सबसे बड़ी चुनौती पहचान नहीं, बल्कि उस पहचान को सकारात्मक रूप से जीना है। उन्होंने कहा, "कट्टरता विभाजन पैदा करती है, जबकि सच्चाई, शिक्षा और सेवा समाज को जोड़ती है। युवा यदि सत्य, सेवा और राष्ट्रीय दायित्व को अपनाएँ, तो पंच परिवर्तन एक जनआंदोलन बन सकता है।"
मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान
सम्मेलन के दौरान इस वर्ष बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। अतिथियों द्वारा विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र एवं पदक प्रदान किए गए। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा में उत्कृष्टता, अनुशासन, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व भविष्य के नेतृत्व की आधारशिला हैं। सम्मान समारोह ने उपस्थित विद्यार्थियों को और अधिक मेहनत करने तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
विकसित भारत 2047 के लिए सामूहिक संकल्प
सम्मेलन का समापन पंच परिवर्तन के मूल्यों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी को बढ़ावा देने, नागरिक कर्तव्यों के पालन तथा पारिवारिक मूल्यों के संवर्धन का संकल्प लिया। सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि भारत का युवा केवल भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान का सबसे सशक्त परिवर्तनकारी बल है। यदि युवा शिक्षा, सेवा, समरसता और राष्ट्रभक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ें, तो विकसित भारत 2047 का सपना अवश्य साकार होगा।

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