- व्यक्ति की संपत्ति संस्कार सम्मान को समाप्त कर देती है बुरी संगति : पं रवि शंकर तिवारी
- परिश्रम के बिना मिली संपत्ति ने इंद्र देवता को बना दिया था अभिमानी
शुक्रवार 28 में से प्रारंभ हुई श्रीमद् भागवत कथा में भागवत भूषण पंडित रविशंकर तिवारी के द्वारा भागवत महात्म महाभारत प्रसंग राजा परीक्षित जन्म और सुखदेव आगमन की कथा प्रस्तुत की जा चुकी है। भावसार समाज महिला मंडल के द्वारा पर्यावरण सुरक्षा विश्व कल्याण और सुख समृद्धि के साथ अच्छी बारिश की कामना को लेकर श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन कराया जा रहा है। समुद्र मंथन प्रसंग सुनाते हुए पंडित श्री तिवारी ने कहा कि देवताओं और राक्षसों के द्वारा अमृत पीने के लिए समुद्र मंथन किया गया लेकिन मंथन में सबसे पहले जहर निकला जहर को कोई लेने को तैयार नहीं हुआ तब भगवान भोलेनाथ ने हलाहल विश्व को अपने कंठ में धारण कर विश्व का कल्याण किया। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ के हृदय में भगवान श्री राम वास करते हैं और श्री राम के हृदय में भगवान भोलेनाथ रहते हैं भक्तों को श्री राम और महादेव में कोई भेद नहीं करना चाहिए। बिना परिश्रम से मिली संपत्ति से राजा इंद्र और देवता अभिमानी हो गए थे तब भगवान श्री नारायण ने समुद्र मंथन कर उनसे परिश्रम कराया था यही नहीं भगवान ने दानवों को भी इस महासमुद्राम मंथन से जोड़ लिया था। भगवान हमेशा सबका कल्याण करते हैं भगवान को कभी भी किसी विपत्ति के लिए दोष नहीं देना चाहिए ।

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