इप्टा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव इंद्र भूषण रमण 'बमबम' ने बताया कि आगामी सांस्कृतिक कार्यक्रम और राज्य सम्मेलन की तैयारियों में स्थानीय युवा कलाकारों की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण दर्शकों के लिए भी विशेष सत्र रखे जाएंगे। उन्होंने कलाकारों एवं जनता से सहभागिता की अपील की है ताकि लोकनाट्य और समकालीन रंगमंच को नई ऊँचाई मिल सके। कार्यक्रम के अंत में मधुबनी इप्टा की ओर से अध्यक्ष श्री अरविन्द प्रसाद ने कार्यकारी महासचिव फीरोज अशरफ खान को मिथिला की पारंपरिक शिष्टाचार-सम्पन्नता के साथ सम्मानित करते हुए उन्हें मिथिला का पाग पहनाकर और चादर ओढ़ाकर सम्मानित किया। उपस्थित गणमान्यों और प्रशिक्षुओं ने इस पारंपरिक सम्मान-अभिवादन का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस बैठक में ऋषि वशिष्ठ, श्रीप्रसाद दास, मनोज कुमार, विकास कुमार, कौशल नायक, अभिषेक आकाश, प्रभात रंजन, रंजीत राय, वैदेही कुमारी, सिमरन, तनु, खुशी, विपुल, अंकित, दुर्गेश, अनुद, आदित्य, ऋषभ, गायत्री, रूपम, व्यांशी, जागृति, चेतना, पवन, अमृत, तन्मय, सोनाली, सुधांशु, आस्था, मानवी, सुबोध, राम प्रशिक्षु समेत कई सदस्य उपस्थित थे।
मधुबनी (संवाददाता) । भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) मधुबनी के तत्वावधान में हनुमाननगर कॉलोनी में चल रही प्रभात रंजन के साथ 20 दिवसीय अभिनय प्रशिक्षण कार्यशाला के दसवें दिन आज एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मधुबनी इप्टा के अध्यक्ष एवं बिहार इप्टा के उपाध्यक्ष श्री अरविन्द प्रसाद ने की। बैठक में तय हुआ कि आगामी माह जुलाई 2026 के प्रथम सप्ताह में मधुबनी में दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध एवं उदीयमान रंगकर्मी सुश्री कनुप्रिया की प्रस्तुति, पटना इप्टा का नाटक तथा मधुबनी इप्टा का नाटक "महाभारत एक्सटेंशन" का मंचन शामिल होगा। अध्यक्ष ने बताया कि ये प्रस्तुतियाँ स्थानीय दर्शकों के लिए नाट्य-परम्परा और समकालीन रंगमंच का सुखद संयोग होंगी। सत्र में हुए निर्णय को साझा करते हुए सचिव रंजीत राय ने बताया कि बिहार इप्टा का राज्य सम्मेलन सितंबर के अन्तिम सप्ताह अथवा अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में मधुबनी में आयोजित किया जाएगा। उक्त सम्मेलन में राज्य स्तरीय कार्यक्रम, कार्यशालाएँ, कवि गोष्ठी, लोक नृत्य, नाटक और समूहों के बीच अनुभव-विनिमय शामिल होंगे। आज की इस अभिनय कार्यशाला में बिहार इप्टा के कार्यकारी महासचिव जनाब फीरोज अशरफ खान ने प्रशिक्षुओं को अभिनय कला के कई महत्वपूर्ण और नायाब गुर सिखाए। प्रशिक्षण के दौरान फीरोज साहब ने खेल के द्वारा एकाग्रता, भावाभिनय, मुद्रा, संवाद-अभिव्यक्ति और मंच संयोजन से जुड़े व्यावहारिक अभ्यास कराये जिससे प्रशिक्षुओं में उत्साह और आत्मविश्वास दिखाई दिया।

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