उन्होंने कहा, “मोहन भागवत जी, क्या गली का क्रिकेटर कर सकता कि वह सुनील गावस्कर है, क्या अन्ना हजारे कह सकते हैं कि वह महात्मा गांधी हैं?” उन्होंने कहा कि भागवत को आरएसएस के पंजीकरण नहीं होने का कारण बताना चाहिए। खेड़ा ने कटाक्ष करते हुए कहा, “आरएसएस के लोग कहते हैं कि वो हिंदू धर्म की रक्षा करेंगे, जबकि उनके सरसंघचालक को अपनी रक्षा के लिए जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा चाहिए। और ये लोग चले हैं हिंदू धर्म की रक्षा करने।” उन्होंने कहा, “भागवत जी हिंदू धर्म को आपकी जरूरत नहीं है, आप हिंदू धर्म से दूर रहिए। आरएसएस से हिंदू धर्म को बचाकर रखना हर भारतीय की जिम्मेदारी है। हिंदू धर्म को आपसे (आरएसएस ) खतरा है।” केरल के त्रिशूर में रविवार को एक बातचीत के दौरान भागवत ने आरएसएस को पंजीकृत कराने की मांगों को खारिज कर दिया था और कहा था कि संगठन न तो गोपनीय रूप से काम करता है और न ही सार्वजनिक जांच से बाहर है। उन्होंने कहा था कि संगठन के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और वह अपनी गतिविधियां खुले रूप से संचालित करता है। पंजीकरण की मांग को ‘राजनीति’ बताते हुए उन्होंने कहा था कि ऐसे प्रयास संगठन के लिए कुछ नया नहीं हैं। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से कहा था कि वह अपना पंजीकरण कराए, अपनी कानूनी स्थिति स्पष्ट करे तथा वित्तपोषण के स्रोत, आय, खर्च और संपत्ति का खुलासा करे। उन्होंने कहा था कि आरएसएस को पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही बनाए रखनी चाहिए।
नई दिल्ली। कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का पंजीकरण नहीं होने के संदर्भ में मोहन भागवत के एक हालिया बयान को लेकर मंगलवार को कहा कि हिंदू धर्म को संघ से खतरा है और भागवत को पंजीकरण नहीं होने का असली कारण बताना चाहिए। पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने एक वीडियो जारी कर यह दावा भी किया कि आरएसएस खुद को सांस्कृतिक संगठन बताता है लेकिन तमाम राजनीतिक और “अंडरग्राउंड” गतिविधियों में शामिल रहता है। उन्होंने कहा, “मोहन भागवत ने कहा है कि आरएसएस पंजीकृत संगठन नहीं है क्योंकि हिंदू धर्म भी तो पंजीकृत नहीं है। यह सुनकर बहुत भद्दा लगा। कहां हिंदू धर्म और कहां यह दो कौड़ी का संगठन।” कांग्रेस नेता का कहना है, “ एक छोटे दुकानदार को भी अपना पंजीकरण कराना पड़ता है। क्या कल वह यह कह सकता है कि मैं भी पंजीकरण नहीं कराउंगा क्योंकि हिंदू धर्म का पंजीकरण नहीं हुआ है?”

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