दूसरा कारण, मानसून के प्रवाह से जुड़ी दक्षिणी-पश्चिमी निचली हवाएं अरब सागर के ऊपर कमजोर पड़ गई हैं। इससे महाराष्ट्र के तट और अंदरूनी इलाकों की ओर नमी का बहाव कम हो गया है। आईएमडी के अनुसार तीसरा कारण, पश्चिमी हिंद महासागर और अरब सागर के ऊपर भूमध्य रेखा को पार करने वाली हवाओं का बहाव - जो दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए नमी का स्रोत है - हाल के समय में कमज़ोर पड़ गया है, जिसके कारण मानसून की गतिविधि में कमी आई है। चौथा, मानसून को आगे बढ़ाने में मदद करने वाली प्रणाली अभी मौजूद नहीं हैं। इनमें अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव वाले क्षेत्र या चक्रवाती हवाओं का घेरा, या पश्चिमी तट के पास काफी ताकत वाला ‘ऑफशोर ट्रफ’ (एक बड़े इलाके में फैला कम दबाव का क्षेत्र) शामिल हैं। पांचवी और आखिरी वजह ‘मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन’ (एमजेओ) का कमजोर दौर है। यह हवा, बादलों और दबाव की एक चलती-फिरती प्रणाली है, जो भूमध्य रेखा के चारों ओर घूमते हुए बारिश लाती है।
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून के दक्षिणी महाराष्ट्र में ठहर जाने से चार जून से 18 जून के बीच देश भर में बारिश में 41 फीसदी की कमी दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अद्यतन आंकड़ों से यह जानकारी प्राप्त हुई। इस दौरान देश में सामान्य वर्षा 72.2 मिमी के मुकाबले सिर्फ 42.6 मिमी दर्ज की गई। आईएमडी के क्षेत्र-वार बारिश के अंतर वाले नक्शे से पता चलता है कि मध्य भारत, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत, दक्षिणी प्रायद्वीप और उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की कमी क्रमशः 67 फीसदी, 42 फीसदी, 22 फीसदी और छह फीसदी है। मौसम विभाग ने बृहस्पतिवार को कहा कि बड़े पैमाने पर अनुकूल मौसमी परिस्थितियों के नहीं होने के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र के आगे देश के बाकी हिस्सों में नहीं बढ़ पाया है। मानसून के उत्तर की ओर बढ़ने की गति धीमी होने के पीछे पांच मुख्य कारण हैं। आईएमडी के अनुसार, पहला कारण मौजूदा मानसून प्रवाह में अरब सागर से आने वाली तेज हवाओं या लहरों की कमी है। मौसम विभाग ने कहा, ‘‘इस तरह की हलचल आमतौर पर नमी बढ़ने और बड़े पैमाने पर बारिश के लिए ज़िम्मेदार होती है, जिससे मानसून आगे बढ़ता है।’’

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